महिला द्वारा फाइनेंस कंपनी का फर्जी कर्मचारी बन एक बस को पहले थाने में जब्त कराया इसके कुछ दिन बाद धोखाधड़ी कर बस को दूसरे के नाम ट्रांसफर करा दिया गया।

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कृतिका सीधी :

फाइनेंस कंपनी का फर्जी कर्मचारी बन एक बस को पहले थाने में जब्त कराया इसके कुछ दिन बाद धोखाधड़ी कर बस को दूसरे के नाम ट्रांसफर करा दिया गया। पीडि़त बस मालिक के द्वारा मामले की शिकायत पुलिस अधीक्षक से करने पर पुलिस अधीक्षक ने चुरहट एसडीओपी जांच कर कार्यवाही करने का निर्देश दिया है। सीधी एस पी ऑफिस आए शिकायतकर्ता बस मालिक अरूण कुमार दुबे पिता शिवशंकर प्रसाद दुबे निवासी सांई नगर भदभदा रोड नीलबड भोपाल ने आरोप लगाया है कि उनके स्वामित्व की 52 सीटर यात्री बस क्रमांक एमपी ०४ पीए २९०३ जो रीवा से चुरहट चल रही थी। यह बस उनके नाम से टाटा मोटर्स भोपाल से फाइनेंस की गई थी। जिसकी किस्ते भी नियमित रूप से अदा की जा रही थी। लेकिन टाटा फाइनेंस की फर्जी सीजर कर्मचारी बनकर एक महिला मनीषा वर्मा द्वारा 30 अगस्त 2019 को मेरी बस को कुछ लोगों के सहयोग से चुरहट थाने में जब्त करा दी गई। बहाना यह किया गया कि बस की किस्ते बांकी हैं। बस को थाने से छुड़ाने के लिए महिला द्वारा चुरहट थाने में कार्यरत सब इंस्पेक्टर धर्मेन्द्र राजपूत का सहारा लिया गया। पुलिस और महिला द्वारा बस को छोडऩे के लिए डेढ़ लाख रूपये की मांग की गई बाद में किसी तरह एक लाख रूपये देने पर बस को छोड़ दिया गया। अरूण दुबे ने आरोप लगाया है कि उक्त बस का अनुबंध 3 सितम्बर 2019 को जावेद अली पुत्र हसन अली निवासी सुदामा नगर इंदौर रोड हरदा से २ लाख ५० हजार में किया गया था। जिसमे वाहन का टाटा फाइनेंस की बकाया राशि यानी किस्ते अदा करने की जिम्मेदारी जावेद अली का था। लेकिन जावेद अली द्वारा 3 सितम्बर 2019 से आज तक किस्ते नहीं भरीं बल्कि धोखाधड़ी करके मेरे बस के बगैर मेरी जानकारी व हस्ताक्षर स्वीकृति के स्वयं अपने नाम हरदा आरटीओ कार्यालय में करा लिया है। पीडि़त बस मालिक ने पुलिस अधीक्षक से बस वापस दिलाये जाने एवं 3 हजार रूपये प्रतिदिन के हिसाब से हरजाने सहित आरोपियों के विरूद्ध कार्यवाही की फरियाद की गई। जिस पर पुलिस अधीक्षक पंकज कुमार कुमावत द्वारा मामले की जांच के लिए चुरहट एसडीओपी को निर्देशित किया गया है।

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