संतान की लंबी आयु और सुख-समृद्धि की कामना के लिए माताओ ने रखा हलषष्टि का ब्रत

सीधी धर्मेंद : भारत बर्ष में हलषष्ठी का त्यौहार पारम्परिक रूप से भाद्रपद महीने की कृष्ण पक्ष की षष्ठी तिथि को मनाया जाता है और इसे विशेष रूप से महिलाओं द्वारा संतान की लंबी आयु और सुख-समृद्धि की कामना के लिए रखा जाता है। बलराम जी का मुख्य शस्त्र हल और मूसल है इसलिए उन्हें हलधर भी कहा जाता है और उन्हीं के नाम पर इस पावन पर्व का नाम हलषष्ठी पड़ा है मान्यता है कि इस दिन श्री कृष्ण के बड़े भाई बलराम का जन्म हुआ था। इसी के कारण इस दिन बलराम जी की पूजा करने का विधान है। मान्यताओं के अनुसार हरछठ पर भगवान बलराम के साथ छठ माता की विधिवत पूजा करने से संतान को अच्छा स्वास्थ्य और लंबी आयु की प्राप्ति होती है। 25 अगस्त को सीधी जिले के साथ सीधी शहर में भी माताओ ने अपने पुत्र की लंबी कामना को लेकर हलषष्ठी का व्रत रखा और विधिवत सिया माई की पूजा अर्चना करके महुआ दही का प्रसाद चढ़ाया और अपने पुत्र के लंबी उम्र के साथ उसके सुख स्वस्थ की कामना की सीधी शहर के पुराना हनुमान मंदिर में हलषष्टि का पूजन करने के लिए माताोओ की भारी भीड़ जमा हुई जिन्होंने विधि विधान पूर्वक पूजा अर्चना की।
