स्थानीय समुदाय की सहभागिता से बिगड़ा वन क्षेत्रों में हो रहा सुधार

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सीधी धर्मेंद : वन क्षेत्र के सुधार में स्थानीय समुदाय विशेष रूप से गरीबों की आजीविका से जुड़े हित निहित हैं। कई पीढ़ियों से स्थानीय समुदाय वनों का संरक्षक एवं संवर्धक रहा है, तथा अपनी आजीविका के लिए वनों पर निर्भर रहा है। इस मूल भावना के साथ वनमंडल सीधी के अंतर्गत वनों के आसपास रहने वाले ग्रामवासियों के द्वारा वनक्षेत्र को वनस्पति से आच्छादित करने का अप्रतिम प्रयास विगत 10-15 वर्षों से योजना बद्ध तरीके से किया जा रहा है। वर्ष 2020-21 से उक्त प्रयास के परिणाम का आंकलन कर नवीन सूक्ष्म प्रबंध योजना निर्माण का कार्य प्रारंभ किया गया है, जिसमें वनों की उत्पादकता में वृद्धि करते हुए उससे प्राप्त होने वाली वनोपज का विवेकपूर्ण उपयोग एवं बंटवारे का प्रावधान किया गया है । इससे वनों में जहां एक ओर जैव विविधता का संरक्षण एवं संवर्धन हुआ है, वहीं स्थानीय समुदाय की वनाधारित आवश्यकताओं की पूर्ति एवं अकाष्ठीय वनोपज के प्रबंधन से स्थानीय रोजगार का सृजन संभव हुआ है। वनमंडल सीधी के वन परिक्षेत्र मड़वास की ग्राम वन समिति शिकरा ने इस परिकल्पना को साकार करके दिखाया है। समिति गठन के समय आवंटित वन क्षेत्र बिगड़ा वन क्षेत्र था, जिसका औसत घनत्व 0.3 था वर्तमान में औसन वन घनत्व 0.5 से अधिक हो गया है। समिति में सम्मिलित अधिकांश परिवार भूमिहीन तथा गरीबी रेखा के नीचे जीवन यापन करने वाले हैं। वर्ष 2016 में समिति का पुर्नगठन किया गया, जिसमें श्री मो. शफीक खांन अध्यक्ष चुने गये। वन अमले के तकनीकी मार्गदर्शन में समिति द्वारा सतत् रूप से अवैध कटाई, अवैध चराई तथा दावानल एवं अतिक्रमण से वनों की सुरक्षा के साथ-साथ वन विकास का कार्य किया गया है। वन क्षेत्र में रकवा 126 हेक्टेयर में मिश्रित वृक्षारोपण किया गया जिसमें सागौन, करंज एवं बांस आदि प्रजातियों कुल 2 लाख 44 हजार 500 पौधे लगाये गये। आज की स्थिति में रोपित पौधे तथा वन क्षेत्र अच्छी स्थिति में है।

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