तुलसी विवाह और पूजा अर्चना करके मनाया गया देवउठनी एकादशी का त्यौहार सक्ले का हुआ फलाहार

सीधी धर्मेंद : पौराणिक मान्यता के अनुसार देवउठनी एकादशी के दिन तुलसी विवाह किया जाता है कुछ लोग तुलसी विवाह द्वादशी के दिन करते हैं ऐसी मान्यता है कि यदि किसी व्यक्ति की बेटी नहीं है, वह यदि इस दिन तुलसी विवाह करता है तो उसे कन्या दान करने का पुण्य प्राप्त होता है। इस दिन के साथ ही मांगलिक कार्यों की शुरुआत भी हो जाती है। देवउठनी एकादशी के दिन लोग व्रत भी रहते हैं और पूजा अर्चना तुलसी विवाह करने के बाद फलाहार करते हैं फलाहार में लोक सकला साबूदाना मिष्ठान फल का इस्तेमाल करते हैं एकादशी के दिन लोग भगवान श्री गणेश माता लक्ष्मी और अपने प्रतिष्ठानों की भी पूजा करते हैं एकादशी व्रत में सकले के महत्व को देखते हुए 15 नबम्बर को सीधी शहर के पालिका बाजार में सकला बेचने और खरीदने वालों की भारी भीड़ जमा हुई और लोगों ने 25 रूपए किलो के भाव से सकले की खरीदारी की एकादशी में गन्ने और टोकरी सूप का भी महत्व होता है एकादशी की सुबह सुबह लोग घर से दरिद्रता हटाने के लिए गन्ने से टोकरी और सूपा को पीटते हुए दरिद्र को घर से बाहर निकालते हैं यह परंपरा पौराणिक मान्यता के अनुसार लगातार चली आ रही है।
