खुले मैदान में धूप के नीचे उन्हें अपनी रोजी रोटी चलाने को मजबूर है थोक सब्जी बिक्रेता

सीधी धर्मेंद : विगत 1 वर्ष पूर्व से कोरोना ने लोगों का जीना हराम कर रखा है कोरोना के शिकार छोटे बड़े सभी तरह के व्यापारी हुए हैं जो आज तक उबर नहीं पाए साल भर बीतने के बाद जब ऐसा लगा कि शायद अभी स्थितियां सुधर रही हैं तो फिर से एक बार कोरोना ने फिर से लोगों का जीना दुश्वार कर दिया है व्यापारियों का व्यापार चौपट कर दिया आम जनता को जान के लाले पड़े हुए हैं पिछले कोरोना में ही सीधी शहर के थोक सब्जी विक्रेताओं को सीधी शहर से बाहर कॉलेज ग्राउंड में भेज दिया गया था जहां पर किसी भी तरह की कोई व्यवस्था नहीं है खुले मैदान में पानी और धूप के नीचे उन्हें अपनी रोजी.रोटी चलाने पड़ रही है 1 साल बीत गए लेकिन आज भी स्थिति जस की तस है और अब फिर से कोरोना कॉल की दूसरी लहर में वह जहां थे वहीं रह गए और आज भी तपती धूप में अपना पेट चला रहे हैं कई व्यापारियों ने शिकायत की कि प्रशासन द्वारा यह की साफ सफाई पर ध्यान नहीं दिया जा रहा है और ना ही हमारे लिए अब तक 1 वर्ष बीतने के बाद कोई नई मंडी की तलाश की जा सकी है । सीधी शहर के थोक सब्जी विक्रेताओं की यह पीड़ा जायज है 1 वर्ष बीत जाने की बात शासन प्रशासन ने इनके लिए कोई नई व्यवस्था या किसी तरह की सुविधा नहीं दी है जबकि नगर पालिका द्वारा इन से बराबर बैठकी टैक्स वसूला जा रहा है ऐसे में उनकी पीड़ा लाजमी है शासन प्रशासन को चाहिए कि स्थिति में सुधार होते ही इनके लिए भी अब एक बेहतर मंडी की व्यवस्था करके इनके तकलीफों को कम किया जाए।
