भगवान परशुराम के मन्दिर गिराने को अजय सिंह ने बताया दुर्भाग्यपूर्ण


Kritika sidhi :
पूर्व नेता प्रतिपक्ष अजयसिंह ने एक विग्यप्ति जारी करके कहा रीवा में सामाजिक और धार्मिक गतिविधियों के इकलौते केंद्र भगवान परशुराम आश्रम को मुख्यमंत्री शिवराज सिंह के इशारे पर प्रशासन द्वारा अचानक ढहाए जाने पर कड़ी आपत्ति की है जिस समय आश्रम ढहाया जा रहा था उस समय वहाँ पर ढ़ोल मंजीरों के साथ राम नाम का संकीर्तन चल रहा था उन्होंने कहा कि यह घटना देश के साधु संतों का घोर अपमान है देश के कई संत महात्मा राम वन पथ गमन और चित्रकूट यात्रा के दौरान यहाँ रुकते थे शिवराज सरकार ने दुर्भावनावश किए गए इस कार्य से भगवान परशुराम और भगवान राम के प्रति आस्था रखने वाली तमाम धर्म प्राण जनता के विश्वास को तोड़ने का जो काम किया है उससे सभी को आघात पहुंचा है उन्होंने शिवराज सिंह से पूछा है कि पूरे प्रदेश में अतिक्रमण करके जो धार्मिक स्थल सालों से निर्मित हैं उन्हें वे कब गिरने वाले हैंघ् इसकी सिलसिलेवार कार्ययोजना वे शीघ्र घोषित करें अन्यथा यह माना जाएगा कि विंध्य प्रदेश की जनता से वे घृणा करते हैं और उसे उपेक्षा से देखते हैं अजयसिंह ने कहा कि भाजपा के तमाम नेता और विधायक वहाँ जब मत्था टेकने लगातार जाते रहे और विश्व कल्याण के लिए आयोजित महायज्ञों में ज़ोर शोर से शामिल होते थे तब उन्हें अतिक्रमण नहीं दिखा आश्रम तोड़े जाने के समय वे सब के सब गायब थे जाहिर है कि धर्म उनके लिए सिर्फ राजनीति का माध्यम है उन्होंने कहा कि नोटिस देने के 24 घंटे के अंदर प्रशासनिक तत्परता का जिले का यह पहला मामला है पूरे प्रकरण में भाजपा जन प्रतिनिधियों की आपसी खींचतान स्पष्ट नजर आ रही है शिवराज सिंह द्वारा दुर्भावनावश की गई इस कार्यवाही को विंध्य की जनता राम जन्म भूमि के शिलान्यास कार्यक्रम से भी जोड़ रही है श्री सिंह ने कहा कि रीवा में ही बड़े बड़े बिल्डरों द्वारा सरकारी जमीन पर बनाए गए बेश कीमती भवन भाजपा सरकार को क्यों नहीं दिखते पूँजीपतियों की सरकार को क्या वे धार्मिक स्थल नजर आते हैं जब प्रशासन और समाजसेवियों के बीच यह तय हो गया था कि भवन का कब्जा शासन ले लेद्य उस पर प्रशासक बैठा देद्य लेकिन आश्रम को तोड़कर जनभावनाओं पर प्रहार न करे तब फिर ऐसा क्या हो गया कि आश्रम को बुलडोजर चला कर अचानक गिरा दिया गया विंध्य प्रदेश की जनता शिवराज सिंह से इस प्रश्न का जवाब मांग रही है अजयसिंह ने कहा कि भगवान परशुराम आश्रम में भव्य यज्ञशाला थी जमीन का संरक्षण कर यहाँ कई किस्म के पेड़ लगाकर स्थल को हरा भरा किया गया था यहाँ विश्व कल्याण के लिए कई बड़े बड़े महायज्ञ हो चुके हैं यहाँ संतों का निवास स्थल जनसहयोग से बनाया गया थाद्य इसे तोड़ने का विरोध करने वाले और जेसीबी मशीन के सामने खड़े हो गए कई साधू संतों को प्रशासन ने बल पूर्वक हटा दियाद्य धर्म की राजनीति करने वाली भाजपा को यह कृत्य करते जरा भी संकोच नहीं हुआ पूरे रीवा शहर में शासकीय ज़मीनों का अतिक्रमण प्रशासन को दिखाई नहीं देता उन्होंने आरोप लगाया कि पूरी कार्यवाही राजनीति से प्रेरित है और समय आने पर विंध्य की जनता इसका जवाब जरूर देगी।

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