मानवाधिकार दिवस के उपलक्ष्य पर सीधी में मानवाधिकार एवं महिलाओं का सशक्तिकरण विषय पर संगोष्ठी का आयोजन किया गया

कृतिका सीधी :मानवाधिकार दिवस के उपलक्ष्य पर जिला एवं सत्र न्यायाधीश वीरेन्द्र प्रताप सिंह के मुख्य आतिथ्य में जिला विधिक सेवा प्राधिकरण सीधी द्वारा जिला – सीधी में मानवाधिकार एवं महिलाओं का सशक्तिकरण विषय पर संगोष्ठी का आयोजन किया गया। मुख्य अतिथि जिला न्यायाधीश वीरेन्द्र प्रताप सिंह ने कहा कि मानवाधिकार हर व्यक्ति का नैसर्गिक अधिकार है, इसके दायरे में जीवन, स्वतंत्रता, बराबरी और सम्मान का अधिकार आता है, इसके अलावा इसमें गरिमामय जीवन जीने का, राजनैतिक, सामाजिक, आर्थिक और सांस्कृतिक अधिकार भी शामिल है। श्री सिंह ने कहा कि भारत ने मानवाधिकार संरक्षण अधिनियम 1993 के तहत राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग का गठन और राज्य मानवाधिकार आयोगों के गठन की व्यवस्था करके मानवाधिकारों के उल्लंघन से निपटने हेतु एक मंच प्रदान किया है, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण द्वारा भी राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण नई दिल्ली एवं म.प्र. राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण जबलपुर के निर्देशानुसार इस दिशा में कार्य किया जा रहा है। जिला न्यायाधीश ने महिला सशक्तिकरण विषय पर अपने विचार रखते हुए कहा कि वर्तमान परिवेश में महिलाए अपने अधिकारों के प्रति अधिक जागरूक हुई है। महिला एवं पुरूष एक ही गाड़ी के दो पहिए हैं जिसके कारण दोनों को परस्पर अधिकारों का सम्मान करना अत्यंत आवश्यक है, और इसकी शुरूआत हम सभी को अपने घर से करना चाहिए। अभिभाषक संघ के अध्यक्ष बृजेन्द्र सिंह बघेल ने कहा कि संपूर्ण मानवता की रक्षा के लिए हमें खुलकर मानवाधिकारों की रक्षा करनी चाहिए। मानवाधिकार कानून द्वारा संरक्षित हैं एवं इनके अतिक्रमण होने पर न्यायालय अथवा मानवाधिकार आयोग में सहायता प्राप्त की जा सकती है। श्री सिंह ने कहा कि व्यक्तिगत स्तर पर किसी देश और व्यक्तियों के समग्र विकास के लिए मानव अधिकार अत्यंत महत्वपूर्ण है और वर्तमान परिवेश में मानवाधिकारों के सरंक्षण हेतु बनाये गये नियमों के समुचित प्रचार-प्रसार करने की आवश्यकता है। अपर जिला न्यायाधीश ललित कुमार झा ने कहा कि मानव को प्रकृति के मूल अधिकारों को सुरक्षित रखना चाहिए, तब ही मानव के अधिकार सुरक्षित रहेंगे। श्री झा ने साउथ आफ्रीका में प्रचलित सिद्धांत “मैं यहा हूं, क्योंकि आप वहां हैं का उदाहरण हेतु हुए कहा कि मानव को परस्पर अधिकरों का सम्मान करना चाहिए। महिला एवं बाल विकास अधिकारी अवधेश सिंह ने कोविड-19 काल में महिलाओं के विरूद्ध हुई घरेलू हिंसा में बढ़ोत्तरी एवं उनके निदान के बारे में बताते हुए कहा कि महिला एवं बाल विकास कार्यालय द्वारा जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सहयोग से पीड़ित महिलाओं को ऑनलाईन विधिक सलाह दी गई तथा कुछ महिलाओं को घरेलू हिंसा से महिलाओं का संरक्षण अधिनियम के अंतर्गत न्यायालय में परिवाद दायर करने हेतु निःशुल्क विधिक सहायता प्रदान की गई है।एनटीवी इंडिया न्यूज़खबर जरा हट कर –
