लगातार 35 वर्षों से कुपोषित बच्चों महिलाओं की देखभाल और समय पर राज्य तथा केन्द्र सरकार के निर्देषों का पालन करने वाली आंगनबाड़ी कार्यकर्ता एवं सहायिका आज भी कोरोना पीडितों की मदद करने के लिए गांव-गाव और घर घर में रात दिन मेहनत कर रही हैं लेकिन राज्य एवं केन्द्र सरकार श्रम कानूनों का उल्लघंन करते हुए आंगनवाड़ी कार्यकर्ता एवं सहायिकाओं के अधिकार पर कटौती करने का और ठेकेदारी प्रथा पर चलाने के लिए षडयंत्र रच रहा है। जिसके विरोध में आंगनवाडी कार्यकर्ता और सहायिका सीटू युनियन के आह्वान पर राष्ट्र व्यापी आन्दोलन के तहत सीधी जिले के विभिन्न परियोजनाओं में धरना प्रदर्शन करके अपनी समस्याओं से संबधित 15 सूत्रीय मांगपत्र प्रधानमंत्री के नाम विभिन्न सीधी जिले के सातों परियोजनाओं में परियोजना अधिकारियों के माध्यम से मांग पत्र सौंपा।
युनियन की मांग है कि 45 वें व 46 वें भारतीय श्रम सम्मेलन की सिफारिशों के अनुसार योजना कर्मियों को कर्मचारी के रूप में मान्यता देते हुए प्रतिमाह न्यूनतम वेतन 21,000 रूपये न्यूनतम वेतन एवं सेवानिवृत्त पर 10,000 रूपये पेंशन प्रतिमाह दिलाया जाय। स्वास्थ्य, पोषण और शिक्षा जैसी सेवाओं के निजीकरण का प्रस्ताव वापस लिया जाय और सार्वजनिक क्षेत्र का निजीकरण करने पर रोक लगाई जाय तथा टैक्स के दायरे के बाहर सभी लोगों को निःशुल्क एवं पर्याप्त कोविड टेस्ट और उपचार की सुविधाएं प्रदान की जांय।
उक्त धरना प्रदर्शन को मुख्य रूप से आंगनवाड़ी ऐकता यूनियन एवं सहायिका की अध्यक्ष श्रीमती सत्यभामा सिंह, सीधी परियोजना में पूनम सिंह, पूजा पाण्डेय, ममता गुप्ता, सुनीता सेन, सिहावल में रेशमा खान, शीला सिंह, आरती विशाद, चुरहट में सुनीता सिंह, सीमा वर्मा, गीता नामदेव, रामपुर नैकिन में संगीता पटेल, ऊषा गुप्ता, मझौली में मन्जू सिंह, नीलम सिंह, ममता वैश्य, भदौरा में सुधा पनाड़िया एवं कुशमी में मुन्नी गुप्ता आदि के नेतृत्व में धरना प्रदर्शन करके ज्ञापन सौंपा गया।