कलेक्टर के निर्देश की सिविल सर्जन ने की अनसुनी

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रक्त के अभाव में जिंदगी और मौत से जंग लड़ रही युवती

सीधी: धर्मेन्द्र
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सरकार बदल गई लेकिन बदहाल स्वास्थ्य व्यवस्था सुधारने का नाम नहीं ले रही है। एक तरफ प्रदेश के मुखिया बेहतर स्वास्थ्य सुविधा देने की बातें करते हैं तो दूसरी तरफ उनके ही कर्मचारी उनके ही आदेशों पर पतीला लगाने पर तुले हुए हैं।
इसकी बानगी बीते शनिवार को देखने को तब मिली जब कलेक्टर के आदेश को भी सिविल सर्जन ने तवज्जो न देते हुए ब्लड देने से मना कर दिया। पीड़िता के परिजनों ने लाख मिन्नतें की लेकिन सिविल सर्जन के कानों में जूं तक नहीं रेंगी।
कलेक्टर के सामने तो सिविल सर्जन ने साफ झूठ बोलते हुए कहा कि मेरे पास कोई ब्लड लेने नहीं आया लेकिन कलेक्टर रवींद्र चौधरी ने कहा कि अब आ गए हैं इनको ब्लड उपलब्ध कराओ। कलेक्टर के सामने तो सिविल सर्जन ने हां बोला लेकिन कलेक्टर के जाते ही ब्लड देने से मना कर दिया।
क्या है पूरा मामला
शशि प्रजापति पिता रामशरण प्रजापति 23 वर्ष निवासी उत्तरी करौंदिया को लीवर में दिक्कत तथा ब्लड की कमी के चलते एक हफ्ते पहले जिला चिकित्सालय में भर्ती कराया गया था। जिसकी हालत नाजुक बनी हुई है। डॉक्टरों ने ब्लड की मांग की है लेकिन मजबूर पिता ब्लड उपलब्ध नहीं करवा पाया। जिसमें दोस्तों को फोन से सारी जानकारी दी गई जिसमें जब एक हज़ार रुपये देने के बाद एक व्यक्ति ने ब्लड दिया है तब जाकर युवती को ब्लड चढ़ पाया है।
प्रमाण पत्र के बावजूद नहीं मिला ब्लड
पीड़िता के पिता ने बताया कि भगवती मानव कल्याण संगठन हमेशा से सेवा करता चला आ रहा है। हम लोग पूरे संगठन के साथ आकर जिला चिकित्सालय में ब्लड दान किए थे ताकि लोगों को जिंदगी को हम लोग बचा सके। जिसका प्रमाण पत्र हमारे पास में है, प्रमाण पत्र देते हुए बोला गया था कि जब कभी ब्लड की जरूरत होगी ब्लड बैंक से आपको ब्लड मिल जाएगा। लेकिन आज वही प्रमाण पत्र कागजों के टुकड़े के सिवाय कुछ नहीं रह गया है।
जवाब पूछते सवाल ?
जिला चिकित्सालय में संगठन द्वारा ब्लड का डोनेशन किया जाता है लेकिन जब उनको ही जरूरत पड़ने पर ब्लड नहीं मिलता तब क्या वो आगे से कभी रक्तदान करेंगे ?
 वहीं दूसरा सवाल यह है कि सरकार तो बदल गई लेकिन सीधी की बदहाल स्वास्थ्य व्यवस्था कब पटरी पर आएगी ? या सब कुछ यूं ही चलता रहेगा ?
 तीसरा सवाल ये है कि क्या कलेक्टर पर सिविल सर्जन भारी पड़ रहे हैं ? जो उनके ही आदेशों को मानने से बाद में इंकार कर देते हैं।
इनका कहना है 
अगर ऐसा हुआ है तो बहुत ही गलत है। मैं अभी सिविल सर्जन को बुलाकर पूछता हूं कि उन्होंने आखिर ऐसा क्यों किया।
रवींद्र चौधरी
कलेक्टर, सीधी
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