पुलिस थाना मझौली अंतर्गत ग्राम देवरी महानदी से डॉगा निवासी विभूती शुक्ला का लाल रंग का (महेन्द्रा सरपंच) ट्रैक्टर 31 मई को रेत उत्खनन करते पुलिस द्वारा पकड़ा गया था जिसे लाकर मझौली थाने में खड़ा भी किया गया था एवं उस पर कार्रवाई किए जाने की चर्चा चल रही थी लेकिन 3 दिन थाना में ट्रैक्टर खड़ा होने के बाद चौथे दिन 3 जून को उस ट्रैक्टर को छोड़ दिया गया।
सूत्रों की माने तो ट्रैक्टर को सौदेबाजी के तहत छोड़ा गया है जबकि लगभग 15 दिवस पूर्व तीन ट्रैक्टर एवं 10 दिन पहले एक 407 मिनी ट्रक पकड़े गए थे जो आज भी थाने में खड़े हैं। जिनमें एक ट्रैक्टर व एक 407 वाहन खाली ही पकड़ा गया था जिसमें एक को वन विभाग द्वारा पकड़कर खड़ा कराया गया था, वहीं तीन ट्रैक्टरों को पुलिस द्वारा पकड़ा गया था जिनके खिलाफ कार्यवाही खनिज विभाग को प्रस्तावित की गई है लेकिन उपरोक्त ट्रैक्टर को ऐसा न करके छोड़ देना पुलिस कार्रवाई पर सवालिया निशान खड़ा करता है। सवाल इसलिए भी खड़ा होता है कि अगर उस मामले में अपराध नहीं बनता है तो 3 दिन तक खड़ा क्यों किया गया ? और मामला गंभीर था तो कार्यवाही न करके छोड़ा क्यों गया ?
पहले भी उठे थे पुलिसिया कार्यवाही पर सवाल
बतातें चलें की अनुविभागीय अधिकारी पुलिस अभिनव कुमार वारंगे की अगुआई में 22 मई को रात्रि लगभग 01:30 बजे खमचौरा पड़वारी पुल पर से तीन ट्रैक्टरों को लाकर थाना परिसर पर खड़ा कराया गया था जबकि प्रत्यक्षदर्शियों की माने तो वहां पर लगभग एक दर्जन वाहन रेत उत्खनन का कार्य कर रहे थे लेकिन पुलिस टीम द्वारा महज तीन वाहनों को पकड़कर उन पर कार्यवाही की गई थी जिनमें से पकड़ा गया एक महेन्द्रा ट्रैक्टर खाली था लेकिन अनुविभागीय अधिकारी पुलिस द्वारा उक्त वाहन पर भी खनिज अधिनियम के तहत कार्यवाही का जामा पहनाया गया जो आज भी नगर में चर्चा का विषय है और उसी की कड़ी में इधर नए ट्रैक्टर को पुलिस द्वारा तीन दिनों तक थाना परिसर पर खड़ा करवाने के बाद महज नाम मात्र की कार्यवाही कर वाहन को छोड़ देना पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवालिया निशान खड़ा करता है।
31 मई की रात्रि गस्त के दौरान खाली ट्रैक्टर घूमते हुए पाया गया था जिसे थाना परिसर में खड़ा कराया गया था, चूँकि ट्रैक्टर खाली पाया गया था तो उस पर 500 रूपये की चलानी रशीद काट कर छोड़ दिया गया।