जिले में आये दिन हो रहे लोग ऑन लाइन ठगी के शिकार

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अभी तक जिले के कई लोगों के डूब चुके हैं लाखों रुपए

कृतिका: सीधी

लॉक डाउन अवधि के दौरान जहां सड़कें सूनी रहीं वहीं असमाजिक तत्वों द्वारा अधिक से अधिक धन कमाने की चाहत लिये सोशल मीडिया के सहारे ऑन लाइन ठगी के कार्य को अंजाम दिया जा रहा है।
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 विगत माह के अपराधों के ग्राफ को देखें तो जिला मुख्यालय के ऐसे चेहरे जो सोशल मीडिया में ज्यादातर ऑन लाइन रहते हुए अपना एक अलग प्रभाव रखते हैं, ऐसे लोगों को या उनकी फेसबुक आईडी सहित अन्य आईडी हैककर के उनके जानने वालों को ठगी का शिकार बनाया जा रहा है। जिले में ऐसे दर्जनों व्यक्ति ठगी के शिकार हो चुके हैं।
कैसे की जाती है ठगी
ठगों के द्वारा आईडी हैक करने के बाद संबधित व्यक्ति को मुसीबत में फॅसे होने का हवाला दिया जाता है उसके बाद त्वरित मदत की चाह लिये हुए ऑन लाईन पे फोन या बैंक अकाउंट में पैसे मॉगे जाते हैं और जैसे ही संबधित खाते में पैसे मिल जाते हैं उसके बाद से हैकर्स अगले मुर्गे की तलास में लग जाते हैं। उक्त प्रकार के दर्जनों प्रकरण विगत एक माह में घटित हो चुके हैं उसके बाबजूद आज दिनांक तक पुलिस के द्वारा कोई भी सार्थक पहल को अंजाम नहीं दिया जा सका है।
नौकरी के नाम पर भी लोग हो रहे ठगी के शिकार 
जिले में ऑन लाइन ठगी के कई प्रकरण लगातार सामने आते ही रहते हैं, इसी प्रकार से वर्तमान समय में बेरोजगारों को भी ठगी का शिकार बनाया जा रहा है। बताया जा रहा है कि ज्यादातर जालसाजों के लिए ऑनलाइन जॉब पोर्टल अपने शिकार को खोजने का सबसे बढिय़ा जरिया होते हैं, ये इस तरह से लोगों को फंसाते हैं कि ज्यादातर युवा असली व नकली का फर्क ही महसूस नहीं कर पाते हैं और नौकरी के झासें में आकर सिलसिलेवार ढंग से ठगी का शिकार होते रहते हैं।
 ज्यादातर प्रकरण में जॉब रिक्रूटमेंट साइट से नौकरी तलाशने वाले की प्रोफाइल निकाली जाती है, उन सभी को बल्क में मेल भेजा जाता है।
फ्रॉड करने वाले खुद को जॉब कंसल्टेंट के तौर पर पेश करते हैं। ये अपनी फर्जी वेबसाइट, अस्थायी दफ्तर दिखाते हैं। लोगों से वॉलेट या बैंक ट्रांसफर के जरिये पैसे मॉगे जाते हैं और इस पूरे प्रकरण में अंतिम तक युवाओं को अहसास तक नहीं होते देते हैं कि उक्त कार्य सिर्फ गलत ढंग से पैसे कमाने के उद्देश्य से किया जा रहा है।
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