बीते लगातार तीन दिनों से प्रकृति के कहर से समूचा सीधी जिला बुरी तरह से अस्त व्यस्त हो गया है। सीधी जिला चुंकी एक ग्रामीण आबादी बाहुल्य जिला है और ऐसा माना जाता रहा है कि बरसात का सीजन 15 जून के बाद से प्रारंभ होता है, वैसे भी इन दिनों नौतपा के दिन लगे होने के कारण लोग भीषण गर्मी से निपटने के फिराक में लगे हुए थे इस दौरान अचानक मौसम ने जोरदार पलटी मारी और बीते 3 दिनों से पूरे सीधी जिले भर में किसी भी वक्त तेज आंधी तूफान का आलम देखा जा रहा है तथा बीते 3 दिनों से रोज शाम ढलते ही आंधी तूफान के साथ बरसात भी होने लगती है जिससे लोगों का जनजीवन अस्त-व्यस्त हो चला है।
जिलेभर में आपदाओं की खबरें
इन दिनों चलने वाली आंधी का रुख आंधी से अधिक तूफान जैसा नजर आता है जिससे पूरे जिले भर में छोटे से लेकर बड़े पेड़ों के जड़ से उखाड़कर गिरने के कारण कई जगहों पर लोगों के घरों को भारी क्षति पहुंची है तो कई जगह पर सड़कें अवरुद्ध हो गई हैं।
इसी तरह इस तेज आंधी तूफान के कारण जिलेभर में बिजली के खंभे और टावर लाइन के खंभे जड़ से उखड़ कर ध्वस्त हो गए हैं जिससे पूरे जिले में बिजली का संकट गहरा गया है, कई इलाकों में तो कई कई दिनों से बिजली ही नहीं है।
हमारे बघवार संवाददाता से प्राप्त जानकारी के मुताबिक कल दोपहर 3 बजे से लेकर शाम 7 बजे तक के बीच आए तेज तूफान तथा पानी तथा ओले गिरने से कच्चे घरों के खपड़े, सीमेंट सीट, कच्ची दीवारें टूट कर बिखर गईं। वहीं आम, जामुन,महुआ आदि फलदार वृक्षों के सहित शीसम, यूकेलिप्टस आदि प्रजातीय वृक्षों के बहुतायत मात्रा में टूट कर गिरने से भारी क्षति पहुंची है। वहीं बिजली के खंभों तथा टावरों के भी गिरने की खबर है। अयोध्या धाम पिपरांव निवासी 105 वर्षीय बुजुर्ग ने बताया कि ऐसी तबाही पहली बार देखने को मिली। बघवारांचल क्षेत्र के ग्राम पटना, सरदा, मझिगवां, करियाझर, मलगांव, पिपरांव, धौरहरा, बघवार, चोरगडी, बुढ़गौना, भरतपुर, खारा, खरहना, सगौनी, भैसरहा, अमिलई, मनकीसर, कपुरी, आदि के सहित सभी ग्रामों में निवासित ऐसा कोई परिवार नहीं बचा, जो प्रकृति के इस कहर से प्रभावित न हुआ हो। शासन स्तर पर क्षतिपूर्ति के रूप में प्रभावितों को राहत मिले, ऐसी जनापेक्षा व्यक्त की गई है।
अल्ट्राटेक सीमेंट भी हुआ प्रभावित
आए तेज तूफान से अल्ट्राटेक सीमेंट के आवासीय परिसर का हाल भी बेहाल हो गया। परिसर में बने शेड क्षतिग्रस्त हो गए, कारोबार भी प्रभावित हुआ, हलांकि प्रबंधन के पुख्ता इंतजाम के चलते शेड्स की क्षति तथा पेड़ों के टूटने के अलावा अन्य के नुकसान की खबर नहीं है।