। बजरंग सेवा समिति ने सीधी शहर में निकाली जवारा यात्रा ।

भारत वर्ष की सबसे पुरानी और प्राचीन आदिवासी कला व संस्कृति इस देश की पहचान है इस देश के गरीब आदिवासी लोगों की उनकी कला संस्कृति की उन्हें एक अलग पहचान देती है भारत देश में आदिवासियों की कला और संस्कृति की एक विशेषता है जो सभी समाज वर्गों को जोड़कर रखती है और समाज की एकता को मजबूत करती है हमारा सीधी जिला आदिवासीी आदिवासी बहुल इलाका है इस जिले में आदिवासी कला और संस्कृति की भरमार है लेकिन जरूरत हैै उन्हें बचाए रखने और संरक्षण देनेे की जिसे देखते हुए जिले की सामाजिक संगठन के क्षेत्र में काम करने वाली संस्था बजरंग सेवाा समिति ने इसका बीड़ा उठाया है और विगत 2 वर्षोंं से जिले की आदिवासी कला संस्कृति के संरक्षण और उसे बढ़ावाा देने में लगे हुए हैं बजरंग सेवा समिति ने अध्यक्ष भास्कर सिंह चौहान श्रीमती गीता सिंह जी बृजेश सिंह जी चौहान शिव कुशवाहा जैसे अनेक कर्मठ कार्यकर्ता और पदाधिकारी हैं जो रात दिन मेहनत करके आदिवासियों के बीच में जाकर उनकी कला और संस्कृति को देश प्रदेश जिले में उजागर करते हैं जिससे देश प्रदेश और इस जिले में विलुप्त हो रही आदिवासी कला संस्कृति को संरक्षण और बढ़ावा मिल रहा है । 7 अप्रैल को बजरंग सेवा समिति ने जिलेेेे भर के आदिवासियों को इकट्ठा करके उनकी कला और संस्कृति केे अनुरूप जवारा यात्रा निकालनेे का काम किया जिसमें जिले भर से आए हजारों आदिवासी भाई बहनों ने शामिल होकर सीधी शहर में जवारा यात्रा और काली खप्पर नित्य की अनुपम झांकी निकाली । कार्यक्रम में बड़ी संख्या में आए आदिवासी भाई बहनों ने शहर में सर पर जवारा रखकर परिक्रमा की परिक्रमा के दौरान आदिवासी भाई बहनों ने भगत गायन के साथ काली खप्पर नृत्य किया जो पूरे शहर में आकर्षण का केंद्र बना ।
बजरंग सेवा समिति का यह प्रयास निश्चित ही जिले के आदिवासी भाई बहनों की विलुप्त हो रही कला संस्कृति को बचाने और उसे संरक्षण देने में कामयाब हो रहा है आज जरूरत है जिले के हर नागरिक को ऐसे समाजसेवी संगठनों को हौसला और उत्साह देने की NTV India news के लिए धर्मेंद्र की रिपोर्ट ।
