टोंको.रोंको.ठोंको क्रांतिकारी मोर्चा के संयोजक उमेश तिवारी : किसान आंदोलन में 120 किसानों की शहादत तथा आंदोलन के 52 वें दिन 15 जनवरी की बैठक भी बेनतीजा

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कृतिका सीधी :

टोंको.रोंको.ठोंको क्रांतिकारी मोर्चा के संयोजक उमेश तिवारी ने प्रेस विज्ञप्ति में बताया है कि किसान आंदोलन में 120 किसानों की शहादत तथा आंदोलन के 52 वें दिन 15 जनवरी की बैठक भी बेनतीजा रही क्योंकि किसान तीन कृषि कानूनों को रद्द करवाने और न्यूनतम समर्थन मूल्य की गारंटी की मांग करते रहे और सरकार के प्रतिनिधि इन कानूनों में संशोधन का प्रस्ताव देते रहे। अगली बैठक 19 जनवरी को तय की गई है उमेश तिवारी ने बताया कि किसान संगठनों द्वारा 13 जनवरी व 14 जनवरी को विभिन्न त्योहारों पर कृषि कानूनों की प्रतियां जलाने के आह्वान पर देश.दुनिया से आये भारी समर्थन से किसानों का उत्साह बढ़ा है। अब यह आंदोलन देशव्यापी और जनांदोलन बनता जा रहा है। संयुक्त किसान मोर्चा उन तमाम संगठनों और व्यक्तियों का शुक्रिया अदा करता है जिन्होंने किसी भी रूप में किसान आंदोलन का समर्थन किया है उमेश तिवारी ने बताया कि सरकार किसानों की मांग को सुनने की बजाय आंदोलन में शामिल लोगों को परेशान करने पर तुली है जो समाजसेवी दिल्ली के लिए बसें भेज रहे है या शहीद किसानों को आर्थिक मदद कर रहे है उन्हें छप्। . राष्ट्रीय जांच एजेंसी द्वारा बार बार जांच के नाम पर परेशान किया जा रहा है। संयुक्त किसान मोर्चा इस मानसिक प्रताड़न का विरोध करता है उमेश तिवारी ने बताया कि संयुक्त किसान मोर्चा सुप्रीम कोर्ट द्वारा प्रस्तावित कमेटी के प्रस्ताव को पहले ही अस्वीकार कर चुका है। कमेटी के सदस्यों की सरकार की तरफ झुकाव की खबरे किसी से छुपी नही है। एक सदस्य भूपिंदर मान के कमेटी से बाहर होने के फैसले का स्वागत हैए साथ ही अन्य सदस्यों से भी अपील है कि अंतरात्मा की आवाज़ सुनते हुएए इन कृषि कानूनों की असलियत को स्वीकार करते हुए वे भी अपना विरोध प्रकट करे और कानूनों को सिरे से रद्द करने की मांग रखे उमेश तिवारी ने बताया कि सयुंक्त किसान मोर्चा द्वारा घोषित 26 जनवरी की किसान गणतंत्र परेड के संबंध में अनेक भ्रांतियां फैलाई जा रही है। संयुक्त किसान मोर्चा स्पष्ट करता है कि किसानों की इस परेड से भारत सरकार की परेड को नुकसान पहुचाने का कोई मकसद नहीं है। 17 जनवरी को किसान संगठनों की मीटिंग में और 18 जनवरी को सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई के बाद ही इस परेड की विस्तृत योजना बताई जाएगी। उमेश तिवारी ने बताया कि मंत्रियो के समूह द्वारा यह दावा करना कि इन कानूनों को रद्द करने संबधी फैसला सुप्रीम कोर्ट ले संयुक्त किसान मोर्चा इस बयान का विरोध करता है। लोकसभा भारत के लोगो द्वारा चुने गए नेताओ का सदन है ये कानून संसद ने बनाये है और इनको रद्द भी ससंद करे यही मांग है।

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