ताजिया निकाल कर मुसलमान भाइयो ने मनाया मातमी त्यौहार मुहर्रम

सीधी धर्मेंद : मुसलमान भाइयो का मातमी त्यौहार मुहर्रम बकरीद के 20 दिन बाद मनाया जाता है। मुहर्रम के दिन खुदा के नेक बंदे हजरत इमाम हुसैन की शहादत हुई थीए मुहर्रम पैगंबर हजरत मोहम्मद साहब के नवासे इमाम हुसैन और उनके 72 साथियों के शहादत की याद में मनाया जाता हैण्इसलिए मुस्लिम समुदाय के लोग इस महीने हुसैन को याद करते हुए मातम मनाते हैं। हजरत इमाम हुसैन इस्लाम धर्म के संस्थापक हजरत मुहम्मद साहब के छोटे नवासे थे। प्रत्येक वर्ष की तरह इस वर्ष भी मुसलमान भाई गम के त्योहार मोहर्रम मना रहे हैं पारंपरिक रूप से प्रत्येक वर्ष की तरह इस वर्ष भी सीधी शहर के जामा मस्जिद के पास ताजियों को ठंडा करने के लिए रखा गया है जहां पर मुस्लिम समाज के बड़ी संख्या में आए लोग इबादत कर रहे हैं इसके साथ लोगों को लंगर बांट रहे हैं। देर शाम मुसलमान भाई जमा मस्जिद में ठंडा करने के लिए रखे गए ताजियों को वापस लेकर बस स्टैंड लौटे इस दौरान समाज लोग अपनी युद्ध कला कौशल का प्रदर्शन करते हैं और महिलाएं मातम करती रही। जामा मस्जिद से बस स्टैंड के लिए निकल गए जुलूस में बड़ी संख्या में मुसलमान भाई शामिल रहे इस दौरान जिला और पुलिस प्रशासन जुलूस की सुरक्षा के कडे इंतजाम करती रही जिससे किसी तरह की कोई अप्रिय वारदात ना हो।
