सीधी शहर में मुसलमान भाइयो ने ताजिया निकाल कर मनाया मातमी त्यौहार मुहर्रम

सीधी धर्मेंद : इस्लाम धर्म के नए बर्ष की शुरुआत मुहर्रम के महीने से होती है इसे हिजरी भी कहा जाता है पूरी दुनिया में हजरत इमाम हुसैन की शहादत की याद में मातम का पर्व मुहर्रम मनाया जाता है इस दिन हजरत इमाम हुसैन के अनुयायी खुद को तकलीफ देकर इमाम हुसैन की याद में मातम मनाते हैं। हर वर्ष की तरह इस वर्ष भी सीधी शहर में गम के त्योहार मोहर्रम को मुसलमान भाइयों ने पारंपरिक रूप से मनाया और हजरत इमाम हुसैन की शहादत को याद करते हुए उनकी याद में ताजिए निकाले ताजियों को ठंडा करने के लिए जामा मस्जिद के पास रखा गया जहां पर लोगों ने पहुंचकर सिन्नी चढ़ाई और फतिया कराया 29 जुलाई को देर शाम ताजियों को जामा मस्जिद से लालता चौराहा की ओर वापस लाया गया इस दौरान मुसलमान भाइयों ने मातम मनाते हुए हुसैन की याद में अपनी युद्ध कलाओं का प्रदर्शन किया इस दौरान ढोल नगाड़े भी बचते रहे मोहर्रम के जुलूस में बड़ी संख्या में महिलाएं और बच्चे शामिल हैं सुरक्षा व्यवस्था के लिए पुलिस और प्रशासन ने बड़ी संख्या में पुलिस जवान तैनात किए थे मोहर्रम के जुलूस के दौरान जगह-जगह लोगों ने शरबत की व्यवस्था की थी।
