सर्व आदिवासी समाज ने रैली निकाल कर पेशाब कांड के आरोपी प्रवेश शुक्ल को फांसी देने के मांग की

सीधी धर्मेंद : सीधी जिले को पूरे देश में शर्मसार करने वाले दसमत रावत पेशाब कांड मे राजनीति रुकने का नाम नहीं ले रही है जबकि इस शर्मनाक कांड में मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने पीड़ित दशमा रावत के पांव धोकर पूरे समाज से माफी मांग ली इतना ही नहीं मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने उक्त घटना को अंजाम देने वाले युवक प्रवेश शुक्ला पर एससी एसटी एक्ट सहित एनएसए जैसी कठोर कार्यवाही कर दी जिसके बाद कुछ दिन तो माहौल शांत रहा लेकिन उसके बाद अखिल भारतीय ब्राह्मण महासभा ने आरोपी व्यक्ति के परिजनों के घर पर बुलडोजर चलाए जाने को गलत बताते हुए सीधी शहर में धरना प्रदर्शन किया और अपना विरोध जताया इस दौरान अखिल भारतीय ब्राह्मण महासभा के अध्यक्ष कुलदीप भारद्वाज ने एक विवादित बयान दे दिया जिसकी वजह से आदिवासी समाज फिर भड़क उठा और उसका अपमान का घाव ताजा हो गया जिसके जवाब में 13 जुलाई को सर्व आदिवासी समाज ने सीधी शहर के पूजा पार्क में बड़ी जन आक्रोश सभा बुलाई जनाक्रोश सभा में सीधी रीवा सतना सिंगरौली शहडोल सहित अन्य कई जिलों से आए आदिवासी नेताओं ने अखिल भारतीय ब्राह्मण समाज के नेता कुलदीप शुक्ला के विवादित बयान की निंदा की और कहा कि आदिवासियों का लगातार अपमान किया जा रहा है जिसे हम बर्दाश्त नहीं करेंगे जन सभा के दौरान आदिवासी समाज ने नेता विवेक कोल ने इस मामले में अपनी तीखी प्रतिक्रिया दी। जनाक्रोश सभा के बाद आदिवासी महासभा के लोगों ने सीधी शहर के पूजा पार्क से जन आक्रोश रैली निकाली रैली के दौरान सर्व आदिवासी समाज के लोग प्रवेश शुक्ला को फांसी देने और सीधी विधायक के खिलाफ जमकर नारे लगाए आदिवासी सर्व समाज द्वारा लगाए गए नारे पूरे शहर में चर्चा का विषय बने हुए हैं। जन आक्रोश रैली जिला कलेक्ट्रेट पहुंची जहां पर आदिवासी नेताओं ने कलेक्ट्रेट में धरना दे दिया और अपनी बात रखने के बाद जिले के कलेक्टर को अपना ज्ञापन देने के लिए अड़ गए इस दौरान जिले के कलेक्टर प्रतिनिधि कई बार आदिवासी नेताओं के सामने आए और उनसे ज्ञापन देने की मांग की लेकिन आदिवासियों ने जिले के कलेक्टर को बाहर आकर उनसे धरना स्थल पर ज्ञापन लेने की मांग की जिसे कलेक्टर ने स्वीकार नहीं किया। कई बार के प्रयास के बाद एक बार फिर से कलेक्टर के प्रतिनिधि ने आदिवासियों के सामने हाथ जोड़े लेकिन फिर भी वह नहीं माने। इस दौरान कई घंटे से कलेक्ट्रेट के सामने धरना दे रहे आदिवासी नेता इंजीनियर विजय कोल निवासी उमरिया से एन टीवी इंडिया न्यूज़ ने उनके मुद्दों पर खुलकर बात की इस दौरान एन टीवी इंडिया न्यूज़ ने आदिवासी नेता से कई कठोर सवाल किए जिसका उन्होंने जवाब दिया धरने पर बैठे आदिवासी समाज कलेक्टर के कई घंटे नहीं आने के बाद आवेशित हो गया और उसने जिले के कलेक्टर को ज्ञापन देने के बजाय जिला कलेक्ट्रेट के सामने स्थित संविधान के रचयिता बाबा साहब भीमराव अंबेडकर को ज्ञापन देना उचित माना आदिवासी नेताओं ने बाबा साहब की प्रतिमा के समीप पहुंचकर अपनी बात मीडिया और जनता के सामने रखी और कलेक्टर और सरकार पर जमकर आरोप सीधी जिले में राजनीतिक तौर पर अब तरह-तरह के प्रयोग देखने को मिल रहे हैं इसके पूर्व अखिल भारतीय ब्राह्मण महासभा ने धरना प्रदर्शन करने के बाद जिला कलेक्ट्रेट पहुंचकर जब जिले के कलेक्टर को ज्ञापन देना चाहा और ज्ञापन नहीं लेने पर नाराज होकर उन्होंने मुख्यमंत्री के नाम का ज्ञापन गधे की फोटो पर दे दिया इस बार एक नया प्रयोग निकल कर सामने आ गया इस बार आदिवासी समाज ने अपनी मांगों का ज्ञापन संविधान के रचयिता बाबा साहब भीमराव अंबेडकर को सौंप कर अपनी बात को जन जन तक पहुंचाने की कोशिश की है आदिवासी समाज का ज्ञापन देने का यह तरीका कितना कारगर होता है इस पर क्या कार्रवाई होती है यह तो आने वाले दिनों में सामने आएगा लेकिन सीधी जिले में इस तरह के हो रहे नित नए प्रयोग पूरे देश में चर्चा का विषय बन रहे हैं।
