बैगा विकास संगठन राष्ट्रीय दलित महासभा ने अपनी मांगों को लेकर सीधी कलेक्ट्रेट को घेरा

सीधी धर्मेंद : 14 मार्च को सीधी जिला कलेक्ट्रेट परिसर में उस समय अफरा-तफरी मच गई जब बैगा विकास संगठन राष्ट्रीय दलित महासभा के 2 सैकड़ा से भी अधिक आदिवासियों ने प्रतिबंधित क्षेत्र के लगे बोर्ड के पास पहुंचकर कलेक्ट्रेट को घेर लिया कलेक्ट्रेट को घेरकर आदिवासियों ने अपनी मांगों को लेकर मध्य प्रदेश की सरकार और शिवराज सिंह के खिलाफ जमकर नारेबाजी की आदिवासियों का कहना था कि उनको आज तक जमीन के पट्टे नहीं दिए गए इसके साथ ही सीधी जिले के बैगा समाज को सुविधा विहीन रखा जा रहा है और उन्हें बैगा प्रोजेक्ट्स से वंचित करके रखा गया है जबकि पूरे प्रदेश में बैगा प्रोजेक्ट लागू है आदिवासियों के ज्ञापन में कहा गया है कि सीधी जिले के धौहनी विधानसभा में एनीमिया की संख्या बच्चों में सबसे ज्यादा है मध्यप्रदेश शासन 6 जिलों के बैगा जाति के महिलाओं को 1000 प्रति माह प्रदान करती है मगर सीधी के साथ सौतेला व्यवहार कर रही है और यहां के बैगा जाति की महिलाओं को यह सुविधा नहीं दी जा रही है इसके साथ ही अन्य कई मांगे बैगा विकास संगठन राष्ट्रीय दलित महासभा के ज्ञापन में शामिल थी कलेक्ट्रेट को घेर कर बैठे आदिवासियों के लीडर से एन टीवी इंडिया न्यूज़ ने उनकी समस्या जानने चाही तो उन्होंने मध्य प्रदेश की सरकार पर कई गंभीर आरोप लगाए यहां तक कि जिले के शासन प्रशासन पर भी उन्होंने आरोप लगाते हुए कहा कि यहां आदिवासियों की सुनवाई नहीं हो रही है उन्हें जमीनों के पट्टे नहीं दिए जा रहे हैं बैगा प्रोजेक्ट से वंचित रखा जा रहा है चुनावी बर्ष me सीधी जिले के आदिवासी बहुल क्षेत्रों के अल्पसंख्यक बैगा जाति के लोग अब अपनी समस्याओं को लेकर जिला मुख्यालय भी पहुंचने लगे हैं लेकिन इनकी समस्याओं का निराकरण ना होना सरकार के उन दावों की पोल खोलता है जिसमें सरकार कहती है कि हम आदिवासियों के लिए कई योजनाएं लागू किए हैं उनके लिए कई सुविधाएं हैं अगर आदिवासियों सभी योजनाओं का लाभ मिल रहा होता सभी सुविधाएं मिल रही होती तो इस तरह से आदिवासियों ko जिले के दूरस्थ आदिवासी अंचलों से चलकर कलेक्ट्रेट पहुंचकर घेराव क्यों करना पड़ता अब देखना है ki शासन प्रशासन इन आदिवासियों की समस्याओं को क्या दूर करता है नहीं तो आने वाले चुनाव में आदिवासी इसका जवाब अपने वोट से देंगे i
