सत्संग के दूसरे दिन स्वामी कृष्णानंद महाराज ने कहा अर्पण दर्पण और समर्पण की भावना होना चाहिए

सीधी धर्मेंद : सीधी शहर के संकट मोचन आईटीआई पडरा में चल रहे तीन दिवसीय सत्संग के दूसरे दिन प्रवचन में स्वामी श्री कृष्णानंद जी महाराज ने कहा हम जैसी भावना करते हैं हमारी सृष्टि वैसी हो जाती हैं जैसा आप देखते हैं वैसा नहीं है जैसा हम सोचते हैं संसार वैसा है इसलिए हमें हमेशा सकारात्मक चिंतन की ओर बढ़ना चाहिए स्वामी जी ने बताया अहंकार भक्ति में सबसे बड़ी बाधा है जैसे ही हनुमान जी को अहंकार हुआ कि मेरे संजीवनी ना ले जाने पर भरत और लक्ष्मण दोनों को प्राप्त हो जाएंगे वैसे ही दूसरे भक्तों के द्वारा भगवान ने उनको बाण मरवा दिया और उनका अहंकार मर्दन किया। भारतीय संस्कृति अर्पण दर्पण और समर्पण की संस्कृति है हमको अपने मित्रों के प्रति अपने गुरु के प्रति और अपने मां-बाप के प्रति अर्पण दर्पण और समर्पण की भावना से रहना चाहिए यही भावना व्यक्तिगत रूप से आध्यात्मिक और आर्थिक उन्नति का आधार बनती हैं लोक और परलोक दोनों में सफलता देती है स्वामी जी के प्रवचन को सुनने के लिए सीधी शहर के गणमान्य लोग श्रद्धालु जन समाज सेवा के पदाधिकारी एवं श्रद्धालु जन उपस्थित रहे बाल व्यास विभूतिपुर के द्वारा भागवत के माध्यम से आध्यात्मिक संदेश दिया गया अध्यात्मिक भजनों से श्रद्धालुओं को प्रेरित किया गया तत्पश्चात भंडारे का आयोजन किया गया दूसरे दिन बाहर से आए हुए महात्मा संत एवं सीधी के श्रद्धालु भक्तगण उपस्थित रहे।
