महात्मा गाँधी नरेगा से जुड़ने पर अकुशल से अर्धकुशल और कुशल श्रमिक तक किए गए है तमाम प्रावधान

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सीधी धर्मेंद : मई दिवस यानि मजदूर दिवस विश्व भर में श्रम की साधना करने वाले सभी श्रमिकों के लिए मनाया जाने वाला एक दिन है। उन सभी के लिए जो हाड़तोड़ मेहनत कर अपने खून पसीने से भरते हैं निर्माण का रंग। जो बनाते हैं कल कारखाने, सड़कें, रेलगाड़ी के ट्रेक, बाँध, नहरें और वो सब जिससे हमारी रोज मर्रा की ज़िंदगी आसान होती है। मजदूर न हों तो दुनिया मजबूर हो सकती यही वो हैं जो हमें देते हैं अपने श्रम से सहूलियतें। हमारे घर से लेकर खेत तक, मिलों से लेकर मीलों दूर तक पाए जाने वाले हर श्रमिक के संगठित होने और अपनी बेहतरी के लिए आवाज़ बुलंद करने का दिन। महात्मा गाँधी नरेगा जहाँ श्रमिकों को एक ओर सौ दिवस का निश्चित रोजगार उपलब्ध कराने की गारंटी देता है वहीं एक वित्त वर्ष में सौ दिवस का रोजगार पाने वाले श्रमिक परिवार के किसी भी वयस्क सदस्य को उसकी इच्छा अनुसार कुशल श्रमिक का प्रशिक्षण भी दिलाता है। प्रोजेक्ट उन्नति के माध्यम दीन दयाल उपाध्याय कौशल योजना, कृषि विभाग और कृषि विज्ञान केंद्र, आरसेटी में श्रमिकों को कारपेंटर, बिजली मिस्त्री, सिलाई, जैविक खाद उत्पादन, राज मिस्त्री जैसे कार्यों का प्रशिक्षण दिलाया जाता है, जिससे श्रमिक का क्षमता वर्धन होता है और वह स्थाई आजीविका बना लेता है। सीधी जिले में 2 लाख 73 हजार श्रमिक पंजीकृत हैं जिसमें 1 लाख 17 हजार महिला श्रमिक हैं। 2 लाख 13 हजार सक्रिय श्रमिक हैं। गत वित्त वर्ष में जिले में श्रमिकों को 54 लाख मानव दिवस सृजित कर रोजगार उपलब्ध कराया गया जिसमें मजदूरी में 98 करोड़ रुपये का व्यय किया गया। इस कार्य में खेत तालाब, मेढ़ बंधान,भूमि समतलीकरण, फलोद्यान, बागवानी, पशु शेड, बकरी शेड, सुअर शेड, हितैषी कपिलधारा कूप जैसी हितग्राही मूलक योजना हैं। जिसमे सामान्य सी प्रक्रिया और दस्तावेज अपने ग्राम पंचायत के सचिव और रोजगार सहायक को देकर योजना का लाभ लिया जा सकता है। सुदूर सड़क, अप्रोच रोड, निर्मल नीर, तालाब डबरी निर्माण, नहर निर्माण, सामुदायिक वृक्षारोपण, मंदिर कुंज, मंदिर सरोवर, बोल्डर चेक डैम, चेक डैम, नर्सरी निर्माण, देवारण्य योजना, गौशाला, चारागाह निर्माण, वनीकरण जैसे सामुदायिक कार्यों के माध्यम से श्रमिकों को बड़े स्तर पर रोजगार दिया जाता है। जिले में योजना प्रारंभ से अब तक 1 लाख 24 हजार से अधिक हितग्राहीमूलक और सामुदायिक कार्य प्रारंभ कर श्रमिको को कार्य दिया गया है।

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