मकर संक्रांति के त्योहार पर मंदिरों में भक्तों की संख्या रही सीमित नैनीताल,

0 271
Main Ad1

नैनीताल -जहां पूरे देश में मकर संक्रांति का त्योहार धूमधाम से मनाया जाता था वही कोरोना के नए वेरियन ओमी क्रोम के चलते मकर संक्रांति का त्योहार पड़ा फीका वही नैनीताल के प्रसिद्ध नैना देवी मंदिर में श्रद्धालुओं की संख्या सीमित ही दिखी इस दौरान भक्तजनों ने मंदिर में महादेव का जलाभिषेक कर सुख समृद्धि की कामना की इस दिन दान पुण्य करने की विशेष परंपरा हिंदु धर्म में मौजूद है। मान्यता है कि मकर संक्रांति पर खिचड़ी बनाने और खाने की है विशेष परंपरा है मकर संक्रांति पर दान पुण्य करने से सुख समृद्धि की प्राप्ति होती है और एक विशेष बात पतंग उड़ान की ये परंपरा त्रेता युग से चली आ रही है। यदि ध्यान से सोच जाए तो ये परम्पराएं धार्मिक भावनाओं को अभिव्यक्त करने के साथ स्वास्थ्य से संबंधित भी है। आइए जानते हैं मकर संक्रांति से जुड़ी कुछ

 

 

Main Ad1

विशेष परंपराओं के बारे में।

हमारे वेदों में मकर संक्रांति को महापर्व का दर्जा दिया गया है। उत्तर प्रदेश और बिहार में मकर संक्रांति के दिन खिचड़ी बनाकर खाने और खिचड़ी से बने पकवान दान करने की प्रथा होने से यह पर्व खिचड़ी के नाम से प्रसिद्ध हो गया है। झारखंड और मिथिलांचल के लोगों का मानना है कि मकर संक्रांति से सूर्य का स्वरूप तिल-तिल बढ़ता है, अतः वहां इसे तिल संक्रांति कहा जाता है।मकर संक्रांति के उपलक्ष्य में उत्तराखंड के बागेश्वर में भव्य मेले का आयोजन होता था लेकिन ओमी क्रोम के खतरनाक वैरीअंट के वजह से मकर संक्रांति का त्योहार उत्तराखंड में भी फीका रहा है।

News TOP Footer