अपने पुत्र की लंबी उम्र की कामना के साथ पुत्रवती माताओ ने रखा हलषष्ठी का ब्रत

सीधी धर्मेंद : भारत देश में पारम्परिक रूप से हलषष्ठी या ललही छठ का व्रत किया जाता है। इस व्रत को कई नामों से जाना जाता है। यह पर्व हलषष्ठी, हलछठ , राधन छठ, हरछठ व्रत, चंदन छठ, तिनछठी, तिन्नी छठ, ललही छठ, कमर छठ, या खमर छठ के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन श्री कृष्ण के बड़े भाई बलराम जी का जन्म हुआ था। इसे बलराम जयंती भी कहते हैं। हलषष्ठी का व्रत केवल पुत्रवती महिलाएं ही रखती हैं। इस दिन माताएं अपने पुत्र की लंबी उम्र की कामना करती हैं। भाद्रपद मास की कृष्ण पक्ष षष्ठी को हलषष्ठी पूजा की जाती है। 28 अगस्त को सीधी शहर में भी हलषष्ठी का व्रत माताओं ने अपने पुत्र की लंबी कामना के साथ व्रत रखकर किया व्रत के दौरान महिलाओं ने सिया माई की पूजा की और उन्हें महुआ और दही का प्रसाद चढ़ाया सीधी शहर के पुराना हनुमान मंदिर में हल छषठी का व्रत करने वाली महिलाएं सिया माई की पूजा के लिए बड़ी संख्या में एकत्रित हुई और उन्होंने पुरोहित द्वारा बताए गए विधि विधान के साथ भगवान बलदाऊ और सिया माई की पूजा अर्चना की और अपने पुत्र की लंबी उम्र की कामना की l
