आशा वर्करों की राज्यव्यापी हड़ताल 11 दिन हो चुके हैं। लेकिन मांगे अब तक नहीं हुई पूरी


नैनीताल के बी डी पाण्डे महिला अस्पताल में आशा वर्कर्स के हो रहे बेमियादी धरने में पहुँचे ऐक्टू के प्रदेश महामंत्री के के बोरा ने कहा कि, “यह सरकार महिला श्रम का खुला शोषण कर रही है। आशाओं पर काम का बोझ बढ़ाकर उनको कोई मासिक मानदेय न देना स्पष्ट रूप से दिखाता है कि यह सरकार आशाओं को मुफ्त का कार्यकर्ता समझती है।” उन्होंने कहा कि, “सरकार फैसला लेने में देर करके आशाओं को थकाने की कोशिश कर रही है लेकिन आशा वर्कर्स न थकने वाली हैं और न ही रुकने वाली। जब तक राज्य सरकार द्वारा सम्मानजनक मासिक मानदेय की स्पष्ट घोषणा नहीं की जाती आशा आंदोलन अनिश्चितकालीन हड़ताल व धरने के रूप में जारी रहेगा।”


ऐक्टू से संबद्ध उत्तराखण्ड आशा हेल्थ वर्कर्स यूनियन की प्रदेश अध्यक्ष कमला कुंजवाल ने कहा कि, “मजबूत एकता और ईमानदारी से संघर्ष ही सफलता की कुंजी है और आशाएँ एकता और संघर्ष की राह पर चलकर अवश्य ही जीत हासिल करेंगी। इस बार राज्य भर की आशा वर्कर्स ने ‘जब तक मासिक वेतन नहीं तब तक काम नहीं’ का पक्का मन बना रखा है। इसलिए सरकार को चाहिये कि देरी न करते हुए तत्काल आशाओं के लिए सम्मानजनक मासिक मानदेय की घोषणा कर शासनादेश जारी करे। इस दौरान धरने में डॉ कैलाश पाण्डेय, दुर्गा टम्टा, किरन मेहरा, रमा गैड़ा, गीता नैनवाल, पुष्पा, सरस्वती, सरिता कुरिया, कुसुमलता, दीपा अधिकारी, चन्द्रा सती, हेमा ठठोला, पूनम, हेमा, गंगा, भगवती शर्मा, प्रेमा पंत, गंगा आर्य, चम्पा जोशी समेत बड़ी संख्या में आशा वर्कर्स मौजूद रही।
