आदिवासियों को आत्महत्या के लिये मजबूर करना भाजपा सरकार की नादिरशाही कहा पूर्व नेता प्रतिपक्ष अजयसिंह ने

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सीधी धर्मेंद : पूर्व नेता प्रतिपक्ष अजयसिंह ने एक विग्यप्ति जारी करके उमरिया में एक आदिवासी युवक सुरेश बैगा द्वारा वन अमले की प्रताड़ना से तंग आकर आत्महत्या करने की घटना को शिवराजसिंह की नादिरशाही बताया है। युवक कठई गांव का रहने वाला था जो प्रताड़ना के चलते फांसी के फंदे पर झूल गया। सिंह ने कहा कि आदिवासी दिवस पर हुई इस मार्मिक घटना की जितनी निंदा की जाए उतनी कम है।अजयसिंह ने आरोप लगाया कि विगत 14 मई को जंगल में मृत बाघ मिलने के बाद से पूछताछ के नाम पर वन अमला सीधे साधे बैगा आदिवासियों को बार बार पकड़ कर ले जाता था। उनके साथ लगातार मारपीट की जाती रही और करंट लगाकर अमानवीय यातनाएं दी गई। मृत सुरेश बैगा के साथ जगदेव बैगाए महिपाल बैगा और सुखलाल बैगा को भी संदेह के आधार पर इसी तरह प्रताड़ित किया जाता रहा जिससे सभी दहशत में आ गए। इनमें से सुरेश ने आत्महत्या कर ली। बाकी तीन लोगों को दी गई यातनाओं के जख्म अभी तक भरे नहीं हैं और उनका इलाज चल रहा है। उनके परिजनों का रो रो कर बुरा हाल है। अजयसिंह ने आरोप लगाया है कि भाजपा सरकारों ने कभी भी अनुसूचित जातियों और आदिवासियों को मन से स्वीकार नही किया। वे उन्हें आदिवासी न मानकर वनवासी सम्बोधित करते हैं। इसी से उनकी मानसिकता का पता लगता है। वन भूमि पर आदिवासियों को अधिकार देने के मामले में भी भाजपा ने हमेशा अड़ंगा लगाया है। वे आज भी अपने अधिकारों के लिए लड़ रहे हैं। उमरिया की घटना पहली नहीं है। लगातार वन अमले द्वारा पूछताछ के नाम पर उन्हें यातनाएं दी जाती हैं और शिवराजसिंह मूकदर्शक बने बैठे हैं। अजयसिंह ने उमरिया में मृत आदिवासी सुरेश के परिवार को 10 लाख रुपये और घायलों को पांच पांच लाख रुपये की आर्थिक सहायता तत्काल देने के लिए मुख्यमंत्री से मांग की है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री शिवराजसिंह यदि वाकई इस तरह की घटनाओं को रोकने के प्रति गम्भीर हैं तो दोषियों के खिलाफ सख्त कार्यवाही करें और भविष्य में उनकी पुनरावृत्ति रोकने के ठोस उपाय करें।

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