किसान सम्मान योजना की 8 वीं क़िस्त जारी करके प्रधानमंत्री ने किसान सम्मान का दिखावा किया कहा उमेश तिवारी ने

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सीधी धर्मेंद : संयुक्त किसान मोर्चा के निर्णय अनुरूप टोंको.रोंको.ठोंको क्रांतिकारी मोर्चा के संयोजक उमेश तिवारी ने एक विग्यप्ति जारी करके कहा है कि किसान सम्मान योजना की 8 वीं क़िस्त जारी करके प्रधानमंत्री ने किसान सम्मान का दिखावा किया है। यह अफसोसजनक है कि एक निरन्तर चल रही योजना को बार बार त्यौहार की तरह पेश किया जाता है सिर्फ छवि चमकाने की कोशिश की जाती है एक तरफ जहां 450 के करीब किसानों की चल रहे किसान आंदोलन के दौरान मौत हो गयी है व किसान 5 महीनों से ज्यादा सड़को पर बिषम परिस्थितियों से जूझते हुए संघर्ष कर रहे है उस समय सरकार सिर्फ कुछ पैसे की क़िस्त भेज कर किसानों का सम्मान करने का दिखावा कर रही है संयुक्त किसान मोर्चा इसकी निंदा करता है। सयुंक्त किसान मोर्चा इसे किसान सम्मान की बजाय किसान अपमान की तरह देखता है। किसानों का असली सम्मान तभी होगा जब सभी फसलों पर सभी किसानों को फार्मूला पर एमएसपी की कानूनी गारन्टी मिलेगी सही खरीद होगी व खाद बीज कीटनाशक डीजल और कृषि उपकरणों का दाम बढ़ाकर कथित सम्मान निधि से कई गुना की लूट बंद करेगी। वर्तमान में पूरे देश के किसानो की सबसे बड़ी आवश्यकता न्यूनतम समर्थन मूल्य है जो वे अपनी फसलों पर चाहते है। किसान पूरी मेहनत करके भी अपनी फसलों के भाव नहीं ले पाते है।भाषण में प्रधानमंत्री कहते है कि भारत मे दुनिया की सबसे बड़ी सार्वजनिक वितरण प्रणाली के तहत अनाज दिया जा रहा है। परन्तु सच यह है कि तीन कृषि कानूनो के लागू होने के बाद यह प्रणाली खतरे में पड़ जाएगी पिछले साढ़े पांच महीनों से सड़को पर समय गुजार रहे किसानों से सरकार आत्मसम्मान छीन कर उन्हें बदनाम कर रही है। किसान को चरमपंथीएकट्टरपंथीए खालिस्तानी व अन्य शब्दों का प्रयोग कर बदनाम किया गया है। दूसरी तरफ टेलीविजन पर किसान सम्मान शब्द का प्रयोग किया जा रहा है संयुक्त किसान मोर्चा इसकी घोर निंदा करता है। भाषण में प्रधानमंत्री कहते है कि भारत मे दुनिया की सबसे बड़ी सार्वजनिक वितरण प्रणाली के तहत अनाज दिया जा रहा है। परन्तु सच यह है कि तीन कृषि कानूनो के लागू होने के बाद यह प्रणाली खतरे में पड़ जाएगी। खेती सेक्टर में कॉरपोरेट के प्रवेश होने व आवश्यक वस्तुओं पर स्टॉक लिमिट हटाने के बाद च्क्ै सिस्टम भी बंद हो जाएगा व देश की अधिकांश गरीब जनता भुखमरी से मर जाएगी। सयुंक्त किसान मोर्चा का संघर्ष इन्हीं मुद्दों को लेकर है। पिछले साढ़े पांच महीनों से सड़को पर समय गुजार रहे किसानों से सरकार आत्मसम्मान छीन कर उन्हें बदनाम कर रही है। किसान को चरमपंथीएकट्टरपंथीए खालिस्तानी व अन्य शब्दों का प्रयोग कर बदनाम किया गया है। दूसरी तरफ टेलीविजन पर किसान सम्मान शब्द का प्रयोग किया जा रहा है संयुक्त किसान मोर्चा इसकी घोर निंदा करता है। 22 जनवरी के बाद सरकार ने प्रदर्शनकारी किसानों से बातचीत नहीं कि है। संयुक्त किसान मोर्चा का कहना है कि सरकार मीडिया में अपनी छवि छलकाने के बजाय दिल्ली की सीमाओं पर बैठे किसानों से बातचीत करे व किसानों की मांगे माने।-

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