लूट के आरोपी बनाए गए दो युवकों के परिजनों ने पत्रकार वार्ता में पुलिस अधीक्षक से लगाई न्याय की गुहार

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सीधी धर्मेंद : विगत दिनों सीधी जिले के मझौली थाना अंतर्गत ग्राम अमेढ़िया निवासी चंद्र कली लोनी और राजेंद्र यादव के साथ एक लाख दस हजार  की लूट हुई थी इस दौरान मोटरसाइकिल पर सवार दो लुटेरों ने राजेंद्र यादव को छुरा मारकर गंभीर रूप से घायल कर दिया था घटना के बाद पीड़ित महिला ने थाने पहुंचकर आरोपी गीतांजलि उर्फ शुभम गुप्ता और संजय गुप्ता को लूट का आरोपी बताते हुए उनके खिलाफ मामला पंजीबद्ध करा दिया महिला द्वारा आनन.फानन में कराए गए मामले को लेकर पुलिस ने भी आनन.फानन में दोनों युवकों को उक्त घटना का आरोपी मानकर उनकी किओस्क से एक लाख दस हजार जप्त कर के उन्हें मुलजिम बना दिया और जिला न्यायालय में पेश करते हुए जेल दाखिल करा दिया अचानक हुई इस घटना के बाद पीड़ित के परिजनों में हड़कंप मच गया और वह अपने बच्चों को न्याय दिलाने के लिए जिले के पुलिस अधीक्षक सहित अन्य अधिकारियों के यहां फरियाद करते घूमते नजर आने लगे लेकिन कई दिन बीत जाने के बाद पुलिस ने आरोपी के पीड़ित परिजनों की फरियाद नहीं सुनी 10 अप्रैल को उक्त घटना के पीड़ित आरोपी के परिजनों ने सीधी शहर गुलाब टावर में पत्रकार वार्ता बुलाई पत्रकार वार्ता में जिले के वरिष्ठ अधिवक्ता चंद्र मोहन गुप्ता जिले के समाजसेवी भोला प्रसाद गुप्ता कमल कामदार अमित सोनी सहित पीड़ित के परिजन मौजूद थे इस दौरान पीड़ित के परिजनों और जिले के वरिष्ठ अधिवक्ता चंद्र मोहन गुप्ता ने अपनी बात रखते हुए कहा कि पुलिस ने आनन.फानन में बिना पूरी जांच पड़ताल किए हुए उक्त दोनों युवकों को आरोपी बना दिया उक्त युवक कियोस्क चलाने का काम करते हैं और एक लाख साठ हजार वह उसी दिन बैंक से निकाल कर लाए थे जिसका उनके पास स्टेटमेंट भी पड़ा हुआ है जिसमे से एक लाख दस हजार जप्त कर के उन्हें मुलजिम बना दिया इसके साथ ही पीड़ित के परिजनों ने कई ऐसे बिंदुओं की मीडिया को जानकारी दी जिसके आधार पर वह पीड़ितों द्वारा दोनों युवकों को आरोपी बनाए जाने की बात को गलत बता रहे हैं और पुलिस की अचानक आनन.फानन में एक भी की गई कार्यवाही पर सवाल खड़े कर रहे हैं। पत्रकार बार्ता में पीड़ित पक्ष ने जिले के पुलिस अधीक्षक से न्याय उचित जांच कर उन्हें न्याय देने की मांग की है। फरियादियों द्वारा पुलिस को दिए जा रहे तथ्यों के आधार पर निश्चित तौर पर जिले के पुलिस अधीक्षक को जांच पड़ताल करनी चाहिए क्योंकि कानून भी यही कहता है कि किसी अपराध को सजा नहीं होनी चाहिए भले ही कोई अपराधी छोड़ जाए ऐसे में यदि पुलिस अधीक्षक ने अपनी देखरेख में जांच करा दी तो दूध का दूध और पानी का पानी हो सकता है।

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