इंद्रवती नाट्य समिति के कलाकारों ने नाटक बसामन मामा की दिखाई शानदार प्रस्तुति

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सीधी धर्मेंद : महाशिवरात्रि की शाम सीधी के वैष्णवी गार्डेन सीधी में इंद्रवती नाट्य समिति के कलाकारों ने नाटक बसामन मामा का शानदार  मंचन किया बसामन का जन्म रीवा जिले के बीड़ा और सेमरिया के बीच स्थित गाँव कुम्हरा में वर्षों पूर्व हुआ था जो अब बसामन मामा के नाम से प्रसिद्ध है बड़ा ही अलग और अनूठा सा नाम है बसामन मामा किन्तु इसकी वास्तविक सच्चाई जानकर आपके रोंगटे खड़े हो जायेंगे बसामन बचपन से ही गुणी और प्रकृति प्रेमी थे दुर्भाग्य वश एक दिन राजा के सैनिकों ने बसामन के प्रेमी बृक्षराज बासुदेव की डाली काटकर हाथियों को खिलाना चाहा जो बसामन को नहीं भाया और वो उन्हें लौटा दियाए सैनिकों ने जाकर राजा से बढ़ा चढ़ाकर बताया जिससे राजा के अहंकार को ठेस पहुंची और वह एकदिन मौका पाकर एक भांट की मदद से आधी रात्रि में बासुदेव का पेड़ कटवा देता है।बसामन कटा हुआ बासुदेव देखकर अपने आप को रोक नहीं पाता और चल देता है राजमहल की ओर इस बात का जब राजा को पता चला तो वह राजमहल के सारे दरवाजे बंद करवा देता है जिससे बसामन का क्रोध और भी बढ़ जाता है और वह कटार मारकर आत्महत्या कर लेता है यह घटना देखकर भांट को आत्मग्लानि होती है और वह भी अपने गले में कटार मारकर मर जाता हैएराजा दोनों का दाह संस्कार करा देता है जहाँ जहाँ खून की बूंदें गिरी रहती हैं मिट्टी डलवा देता है पर इससे कोई समाधान नहीं होता बसामन की आत्मा राजमहल की रसोई से भोजन नष्ट कर देता है और पूरे राजमहल वा राजा सहित सभी सैनिकों को भी नष्ट कर देता है इसके बाद रानी और उसका राजकुमार जो ननिहाल में थे आते हैं बसामन उन्हें भी मारना चाहता है पर राजकुमार मामा कहकर क्षमा मांगता है और बसामन दोनों को माफ़ कर देता है और कहता है कि दोनों गंगा के पार चले जाओ और खुद भी बासुदेव की सूखी लकड़ी जमीन पर गड़ाकर मैहर शारदा माता की शरण मे चला जाता है 12 वर्ष की तपस्या और सेवा के बाद सिद्धि प्राप्त कर पूर्ण बरम बाबा बन जाता है और शारदा माई की आज्ञा पाकर अपने गांव में चौरा स्थान लेता है और सभी गांव वालों की पीड़ा को दूर कर खुशहाल गांव बना देता है।

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