22 सितंबर को कंप्यूटर व्यवसाई निशांत प्रकाश श्रीवास्तव की हुई थी मौत
धर्मेन्द्र – सीधी
प्रभारी सीएमएचओ तथा सिविल सर्जन के लापरवाही रवैया से 40 वर्षीय कंप्यूटर व्यवसाई निशांत प्रकाश श्रीवास्तव ने 22 सितंबर को सही समय पर एंबुलेंस नहीं मिलने के कारण दम तोड़ दिया था। जिसकी आग अब प्रदेश के मुखिया शिवराज सिंह चौहान तक पहुंच गई है। जहां कमिश्नर ने न्यायिक जांच कर 1 सप्ताह के अंदर रिपोर्ट प्रस्तुत करने का आदेश दिया है। वही प्रभारी सीएमएचओ एवं सिविल सर्जन को हटाने के लिए प्रदेश भर में ज्ञापन सौंपा जा रहे हैं।
सिविल सर्जन तथा प्रभारी सीएमएचओ की लापरवाही रवैया के कारण जिले भर में आक्रोश है जहां समाजसेवी भी आगे आए हैं। लापरवाह सिविल सर्जन तथा सीएमएचओ को हटाने के लिए सीधी रीवा समेत भोपाल में ज्ञापन सौंपा गया है। जहां शनिवार को रीवा कमिश्नर राजेश कुमार जैन को अखिल भारतीय कायस्थ महासभा के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं पूर्व सांसद कैलाश नारायण सा रंग एवं प्रदेश इकाई के अध्यक्ष सुनील श्रीवास्तव ( भोपाल) तथा संभाग के संभागीय इकाई के प्रतिनिधि मंडल ने 24 सितंबर को कमिश्नर को ज्ञापन सौंपकर प्रभारी सीएमएचओ एवं सिविल सर्जन डॉ डीके द्विवेदी को हटाने तथा पीड़ित परिवार को आर्थिक क्षति पूर्ति देने की मांग किया गया है। जिसको लेकर कमिश्नर राजेश कुमार जैन ने मजिस्ट्रियल जांच के आदेश कलेक्टर को देखकर एक सप्ताह के अंदर रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा है। उल्लेखनीय है कि 21 सितंबर को कोरोना संक्रमण के चलते जिला न्यायालय के बगल में स्थित शॉपिंग कांप्लेक्स में 40 वर्षीय युवक निशांत प्रकाश श्रीवास्तव को अस्पताल परिसर के आइसोलेशन वार्ड में भर्ती कराया गया था जहां 22 सितंबर को शाम 6 बजे अचानक तबीयत बिगड़ने लगी थी तथा डॉक्टर जॉन के द्वारा मरीज को रीवा रेफर किया गया था। जहां लापरवाही रवैया के कारण 5 घंटे तक मृतक को एंबुलेंस नसीब नहीं हुआ था वही प्रभारी सीएमएचओ तथा सिविल सर्जन ने अपनी जिम्मेदारी से भागते हुए फोन उठाना तथा मृतक को एंबुलेंस उपलब्ध कराना जरूरी नहीं समझा। जहां शाम 6 बजे से लेकर रात्रि के 11 बजे तक एंबुलेंस का इंतजार करना पड़ा था। 5 घंटे बाद एंबुलेंस आने के कारण पीड़ित की मौत हो गई है।
वायरल हुआ था वीडियो जमीन पर तड़प रहा था मरीज
22 सितंबर को कंप्यूटर व्यवसाई प्रकाश निशांत श्रीवास्तव मौत के पहले कई सोशल मीडिया में वीडियो वायरल हुआ है जहां जमीन पर मरीज तड़प रहा था लेकिन स्वास्थ विभाग के अमले ने वेंटिलेटर का सहारा देना उचित नहीं समझा तथा सही टाइम पर ऑक्सीजन भी नहीं दिया गया मृतक के परिजनों द्वारा बताया गया था कि रेफर करने के बाद स्वास्थ्य विभाग के अमले ने आइसोलेशन वार्ड के बाहर निकाल दिया था जहां 5 घंटे तक बिना वेंटीलेटर व ऑक्सीजन के मरीज बाहर तड़प रहा था जिससे रात्रि 11 बजे के लगभग पीड़ित की मौत हो गई है।