हलषष्ठी पर माताओं ने मांगा पुत्र के लिए वरदान

0 327
Main Ad1

जिले भर में महिलाओं ने हर्षोल्लास मनाया त्योहार 

सीधी:धर्मेंन्द्र 

Main Ad1
भाद्रपद मास कृष्ण पक्ष की षष्ठी को मनाये जाने वाला हलषष्ठी (हरछठ) त्योहार बड़े ही हर्षोउल्लास के साथ सीधी जिले के विभिन्न हिस्सों में मनाया गया।  इस दिन माताएं अपने पुत्र के सुदीर्घ जीवन की कामना हेतु पूरे विधि विधान से हलषष्ठी का पूजन और व्रत करती हैं। इस अवसर पर  भगवान शिव जी माता पार्वती के साथ गजानन गणेश एवं कार्तिकेय जी की आराधना की गई। घरों में बनाए गए पूजा स्थल को पुष्प और रंगोली से आकर्षक रूप दिया गया था। इस मौके पर माताओं ने अपने पुत्र की जीवन रक्षा के लिए छिवली-जारी का पूरे विधि से पूजन किया। इस खास मौके पर माताओं ने पूजा स्थल पर छिवली-जारी एवं भकुआ का विशेष पूजन किया गया। इस दौरान महिलाओं ने महुआ समेत सात प्रकार के अन्न भी भगवान को अर्पित किए। पूजन के पश्चात फसही के चावल तथा भकुआ में महुआ व दही मिश्रित प्रसाद का वितरण किया गया।
आधुनिकता के साथ लोकरंग
समय के साथ हमारे त्योहार में आधुनिकता के साथ लोक रंग भी देखने को मिल रहा है। कई स्थानों पर महिलाओं ने इस अवसर पर सोहर तथा दूसरे लोक गीत गाकर पर्व के उल्लास को अभिव्यक्त किया जबकि कुछ स्थानों  पर यूट्यूब व सोशल मीडिया के माध्यम से छठ कथा सुनने के साथ लोकगीत का आनन्द भी लिया। खास बात यह है कि नई पीढ़ी की महिलाएं भी अपने पर्व को लेकर अत्यंत उत्साहित रहती हैं। ग्रामीण क्षेत्रों से भी ‘स्टार समाचार’ को हलषष्ठी के अत्यंत आकर्षक व प्रेरक चित्र प्राप्त हुए।
कोरोना संकट का दिखा असर
हालांकि इस बार कोरोना संकट का प्रभाव हलषष्ठी पर्व पर भी देखने को मिला। एक दिन पहले ही बाजारों में सोशल डिस्टेंसिंग के साथ चुरकी,महुआ, फल, पूजन हेतु अन्य पूजन सामग्री खरीद ली गई थी। वहीं व्रत वाले दिन महिलाएओं ने अधिक संख्या में एकत्र होने के बजाय अपने घरों में ही पूजन करना उचित समझा। यहां उलेखनीय है कि बघेलखण्ड में हलषष्ठी और तीज दो ऐसे बड़े त्योहार हैं, जिसे महिलाएं बड़े ही उमंग के साथ मनाती हैं।
इनका कहना है
इस बार हमने कोरोना संकट से परिवार तथा समाज की रक्षा का वरदान भगवान शिव जी से हलषष्ठी के अवसर पर मांगा।
दीपाली शर्मा,
गृहणी
News TOP Footer