करोड़ों की लागत में बना महाविद्यालय बाट जोह रहा अपने उत्थान की

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चुरहट महाविद्यालय आखिर क्यों हो रहा उपेक्षित ?

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आर.बी.सिंह राज

क्षा मानव को एक अच्छा इंसान बनाती है। शिक्षा में ज्ञान, उचित आचरण और तकनीकी दक्षता, शिक्षण और विद्या प्राप्ति आदि समाविष्ट है और जहां तक महाविद्यालयों की बात है वो युवाओं के लिए शिक्षा का एक नया आयाम देने का केंद्र रहा है। यह कौशल, व्यापारों या व्यवसायों एवं मानसिक, नैतिक और सौन्दर्यविषयक के उत्कर्ष पर केंद्रित है। लेकिन चुरहट महाविद्यालय की दुर्दशा का जिम्मेदार किसे कहा जाए यह एक यक्ष प्रश्न की तरह घूम रहा है।
 ज्ञात हो कि चुरहट से हायर सेकेंडरी पास करने के बाद लगभग 75 परसेंट छात्र रीवा जबलपुर, इंदौर, भोपाल की ओर पढ़ने के लिए पलायन करने को मजबूर  हैं। गरीब मां बाप के लिए अपनी मेहनत की कमाई से बच्चों को इंदौर जैसे शहरों में पढ़ाना अत्यंत दुष्कर हो जाता है, लेकिन चुरहट के राजनेताओं का ध्यान इस ओर नहीं आकर्षित होता है।
चुरहट महाविद्यालय के उत्थान की की गई कोशिस
चुरहट महाविद्यालय की स्थापना आज से लगभग 30 वर्ष पूर्व उस समय के तात्कालिक मुख्यमंत्री एवं कुंवर अर्जुन सिंह की कुर्सी के उत्तराधिकारी रहे मोतीलाल बोरा द्वारा 1989 में की गई थी। शुरुआती दौर में यह महाविद्यालय किराए के मकान पर संचालित था जिसमें लगभग 10 कमरे थे और उसमें केवल एक ही संकाय बीए की उपलब्धता थी जिससे चुरहट क्षेत्र के छात्र इस महाविद्यालय में एडमिशन ना लेकर रीवा भोपाल इंदौर जबलपुर जैसे महानगरों में पढ़ने के लिए जाते थे लेकिन विडंबना इस बात की है कि चुरहट महाविद्यालय की स्थापना के लगभग 15 साल बाद जब कुंवर अर्जुन सिंह भारत सरकार में मानव संसाधन विकास मंत्रालय में मंत्री रहे तब उन्होंने चुरहट के उत्थान के लिए अनुदान एवं पर्याप्त भूमि स्वविकृत किये थे तब लगा था कि चुरहट महाविद्यालय का उत्थान  हो जाएगा लेकिन करोड़ों रुपए की लागत से बनी चुरहट महाविद्यालय की बिल्डिंग केवल दिखावे के लिए रह गई है और इसकी जस की तस राह गई।
साल दर साल घट रही छात्रों की संख्या
चुरहट का इकलौता शासकीय महाविद्यालय उपेक्षा का दंश झेल रहा है। जिसके चलते यहां न तो छात्र संख्या में बढ़ोत्तरी हो रही है और न ही इस ओर किसी का रुझान ही है। यही वजह है कि शासकीय महाविद्यालय में प्रवेश लेने वाले छात्रों की संख्या साल दर साल घटती जा रही है। यही स्थिति रही तो वह दिन दूर नही जब यह महाविद्यालय नाम का  रह जायेगा और यहां पढ़ाने वाले तो रहेंगे लेकिन पढऩे वाला कोई नहीं होगा। इस सत्र में  महाविद्यालय की छात्र संख्या की ओर नजर दौड़ाई जाये तो वह बहुत ही दयनीय है। दर्ज छात्रों के आंकड़े चौका देने वाले हैं। स्नातक बी ए संकाय के समस्त   कक्षाओं में महज 60 छात्र अध्ययनरत हैं। छात्रों की यह दर्ज संख्या ही महाविद्यालय की स्थिति का आंकलन करने के लिये काफी है। छात्रों के साथ ही प्राध्यापकों की स्थिति भी चौकाने वाली ही है। नाम के इस महाविद्यालय में प्राध्यापकों के महज 7 पद स्वीकृत हैं। जिसमें भी सभी प्राध्यापक पदों में  प्रभारी प्राचार्य ही अपनी सेवा दे रहे हैं।
क्यो घट रही छात्रों की संख्या
  चुरहट का यह इकलौता  महाविद्यालय पूरी तरह से उपेक्षित है और दिन
-ब-दिन यह अपना अस्तित्व खोता जा रहा है। प्रशासनिक स्तर पर भी इस महाविद्यालय की ओर कोई विशेष ध्यान नहीं दिया जा रहा है। यहां गरीब परिवार के बच्चे ही शिक्षा ग्रहण करने आते हैं लेकिन बीए के अलावा अन्य संकाय ना होने के कारण अब वो भी यहां प्रवेश लेने से कतरा रहे हैं।
महाविद्यालय के अंदर उगे हैं खरपतवार
चुरहट महाविद्यालय के लिए एक तरीके से हाई फाई इमारत तैयार की गई थी लेकिन स्थिति ये है कि आज उसमें खरपतवार इस तरह से उग आए हैं जैसे कोई खंडहर हो, हमारी टीम जब यहां सर्च करने गई तो पाया कि बिल्डिंग के अंदर 5 फिट से ज्यादा बड़े छोटे मोटे खरपतवारों से भरी पड़ी है, सारी बिल्डिंग की बाहरी बस्तुएं टूटी फूटी पड़ी हैं और शराबियों और गजेडीयों का अड्डा भी बन चुका है।
इस मामले में जब चुरहट क्षेत्र के  छात्र-छात्राओं से बात की तो  उनकी राय कुछ इस तरह रही
हमारे क्षेत्र में संचालित महाविद्यालय हमारे क्षेत्र से इतना किनारे है कि लड़कियों के लिए खतरे से खाली नहीं है, मैं चाह के भी अपनी पढ़ाई आगे करने के लिए कॉलेज में एडमिशन नहीं ले पा रही हूं, ना ही वाणिज्य संकाय है जो किसी भी छात्र के लिए चिंतनीय है।
अपर्णा सिंह
छात्रा
मैं हाल में कक्षा-12वीं विज्ञान संकाय से पास किया हूं और मेरे पिताजी के पास शहर से बाहर भेजने की आर्थिक व्यवस्था नहीं है। अपनी पढ़ाई आगे जारी रखना चाहता हूं लेकिन हमारे क्षेत्र में संचालित महाविद्यालय में व्यवस्था ना होने के कारण मुझे आगे की पढ़ाई में बाधा उत्पन्न हो रही है।
आस्तिक सिंह
छात्र
चुरहट में स्थित शासकीय महाविद्यालय में छात्रों के लिए केवल कला समूह की व्यवस्था की गई है जिससे अन्य समूह के छात्रों को मजबूरी बस चुरहट से दूर दाखिला लेना पड़ता है जिससे हमें विभिन्न प्रकार की परेशानियों का सामना करना पड़ता है। अतएव शासन प्रशासन से हमारी मांग है कि चुरहट महाविद्यालय में कला समूह के साथ अन्य समूह की व्यवस्था की जाय।
प्रशांत गुप्ता 
पूर्व छात्र एवं शिक्षक
चुरहट महाविद्यालय क्षेत्र का इकलौता कॉलेज है फिर भी कोई छात्र उच्च शिक्षा के लिए यहां नहीं आना चाहता जिसके पीछे कई कारण नजर आ रहे हैं, एक तरफ महाविद्यालय की बिल्डिंग क्षेत्र के किनारे स्थित है, जहां लड़कियों का जाना किसी खतरे से कम नहीं, जिसके छात्र छात्राएं यहां नहीं जाना चाहते और क्षेत्र से बाहर रीवा सीधी जाना पड़ता है।
सत्यम सोनी 
पूर्व छात्र एवं शिक्षक
 कोरोना वायरस का संक्रमण तीव्र गति से बढ़ रहा है जिससे विज्ञान समूह के छात्रों के लिए चुरहट महाविद्यालय में कोई व्यवस्था नहीं है जिससे विज्ञान समूह के छात्रों को चुरहट से दूर दाखिला लेना पड़ेगा जो गरीब छात्रों के लिए बहुत बड़ी समस्या है क्योंकि वर्तमान में आवागमन के साधन भी नहीं है।
निखिल पटेल
अगर चुरहट महाविद्यालय में कला समूह के अतिरिक्त विज्ञान समूह की व्यवस्था होती तो आज मुझे इंदौर में पढ़ने के लिए नहीं जाना पड़ता। महंगाई के इस दौर में इंदौर और भोपाल में पढ़ाई करना हमारे पेरेंट्स के लिए बहुत कठिन हो रहा है सरकार और प्रशासन को इस पर विशेष ध्यान देना चाहिए जिससे आने वाली पीढ़ी को इस तरह के संकट से न जूझना पड़े।
संगम पांडेय 
छात्र बीएससी बॉयोटेक इंदौर
चुरहट छेत्र में खासतौर पर छात्राओं को 12वीं के पश्चात विज्ञान समूह न होने के कारण अपने इच्छाओं एवं सपनों का गला घोटना पड़ता है या तो मजबुरी बस उन्हें कला समूह के साथ शिक्षा की औपचारिकता पूरी करनी पड़ती है जिससे इन सभी छात्राओं का भविष्य अंधकार में डूब जाता है एतएव शासन प्रशासन को देश में मेडिकल क्षेत्र को मजबूत करने के लिए चुरहट महाविद्यालय में विज्ञान समूह की व्यवस्था की जाय।                              शेफाली सिंह
छात्रा
महाविद्यालय की जर्जर हालत को देखते हुए मैं इस महाविद्यालय में एडमिशन नहीं ले पाई और मुझे चुरहट से बाहर पढ़ने जाना पड़ा और मुझे यहां से भर पढ़ने में मुस्किलो का सामना करना पड़ रहा है।
अनुष्का सिंह 
छात्रा रीवा
चुरहट में उच्चतर की कक्षाओं में 70% छात्र छात्रायें विज्ञान समूह से अध्ययन करते हैं परंतु आर्थिक स्थिति सही न होने के कारण चुरहट से दूर दाखिला नहीं ले सकते हैं जिससे उनका भविष्य अंधकारमय हो जाता है अतएव शासन को विज्ञान समूह के छात्रों के भविष्य को देखते हुए चुरहट महाविद्यालय में विज्ञान समूह की व्यवस्था की जाय।
अखिल गुप्ता
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