बहरी में नजूल भूमि पर दुकान निर्माण करने वाले संविदाकार की बड़ी मुश्किल
कृतिका: सीधी
जिले के बहरी बाजार में नजूल की भूमि पर डेढ़ दर्जन दुकानों को बनाने वाले संविदाकार की मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं। दरअसल जो व्यापारी 80 हजार से लेकर एक लाख रूपये तक दुकान लेने के नाम पर दिये थे अब वे लामबंद होने लगे हैं। व्यापारियों द्वारा इस मामले को लेकर प्रशासन तक शिकायत करने की बात कर रहे हैं। ऐसे में संविदाकार की मुश्किल कम होती नजर नहीं आ रही है। जाहिर है कि कहीं न कहीं व्यापारियों के साथ ना-इंसाफी की गई थी। जिसकी बदौलत व्यापारियों में आक्रोश कम नहीं दिख रहा है।
बहरी बस स्टैण्ड में तहसील कार्यालय स्थित है उसके ठीक नीचे मुख्य मार्ग में ही आराजी नं. 160 रकवा 2.064 हेक्टेयर भूमि मध्यप्रदेश शासन की है। ये भूमि बहरी-सिंगरौली मुख्य मार्ग के पचासा में स्थित है। इसी भूमि में 7 गुणे 144 फिट पर अवैध कब्जा करते हुए 18 दुकानों का निर्माण संविदाकार राजीव कुमार उर्फ बबलू सिंह बाघेल द्वारा करा दिया गया। दुकान का निर्माण अवैध रूप से शुरू होते ही ग्राम पंचायत बहरी के सरपंच एवं सचिव द्वारा रोकने का प्रयास किया गया फिर भी कोई असर नहीं हुआ। इसी बीच 18 दुकानों में व्यापारियों से 80 से एक लाख के बीच नगद राशि लेकर न तो उन्हे संविदाकार द्वारा रसीद दी गई और न ही कोई कागजात प्राप्त हुआ है। अब संविदाकार की शिकायत पर जिम्मेदार अधिकारी मामूली कार्यवाही कर दुकानदारों द्वारा दी गई राशि की रसीद दिलाने में भी कोई पहल नहीं कर रहे हैं। बहानेबाजी कर संविदाकार सारा दोष पंचायत पर मढ़ रहे हैं। लेकिन वास्तविकता यह है कि बिना स्वीकृत दुकानों का निर्माण कराने के बाद आखिरकार उन पर कार्यवाही क्यों नहीं हो पा रही है।
इस मामले को लेकर दुकान खरीदने वाले व्यापारी ये कहने को मजबूर हो रहे हैं कि या मुझे दुकान की रसीद एवं कागजात दिया जाये या फिर पैसा वापस किया जाये। मामला प्रशासन तक पहुंचने तक पहुंच चुका है ऐसे में व्यापारियों के साथ हुए अन्याय को लेकर जिला प्रशासन क्या निर्णय करता है यह भी एक प्रश्नचिन्ह बना हुआ है।
दरअसल डेढ़ दर्जन दुकानें बनाने के दौरान संविदाकार को गरीब व्यापारियों ने ही अपनी निजी दुकान शुरू करने की मकशद से यह रकम दी थी। हाथ ठेला व्यापारी, नाई, दर्जी सहित ऐसे कई व्यापारी हैं जिन्होने रकम देकर दुकान तो चालू कर दी लेकिन आज तक उन्हे न तो रसीद हासिल हुई न ही कोई कागजात। संविदाकार पंचायत सचिव का बहाना बनाकर मामले को दबाना चाह रहे हैं वहीं सचिव द्वारा यह कहकर पल्ला झाड़ा जा रहा है कि इस मामले में पंचायत का कोई रोल नहीं है। पंचायत के बिना अनुमति दुकाने निर्मित की गईं हैं। इसके लिए संविदाकार ही दोषी है।
जिला प्रशासन को किया गया पत्राचार : एसडीएम
एसडीएम सिहावल सुधीर बेग ने बताया कि इस मामले में जिला प्रशासन को पत्र जारी किया गया है। उन्होने कहा कि इसके पहले संबंधित ठेकेदार के खिलाफ कार्यवाही भी जा चुकी है। वहीं 248 के तहत बेदखली की कार्यवाही भी की गई है। श्री बेग ने कहा कि मामले की जांच करायी जाएगी यदि जो भी दोषी होंगे उस पर निश्चित रूप से कार्यवाही होगी।