आंख भर आई पर मानवता नजर ना आई , ब्लडिंग जा रही महिला को धक्के मारकर किया बाहर

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जिला चिकित्सालय का खुलासा कर रहे रिपोर्टर को ही धमकाने में उतारु सिविल सर्जन

【आर.बी.सिंह राज】
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जिला चिकित्सालय इस समय कुछ ना कुछ विवादों को लेकर सुर्खियों में बना हुआ है। बीजेपी सरकार आने से लोगों की एक उम्मीद बढ़ी थी कि स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर सरकार कुछ नयी पहल करेगी लेकिन जमीनी हकीकत में स्वास्थ्य व्यवस्था और भी बदहाल हो गई है। बीते 2 दिन पहले सिविल सर्जन डॉ डीके द्विवेदी का 10 लाख रुपए का घोटाला उजागर हुआ है। तो वहीं बीते रविवार को कलेक्टर के आदेश के बावजूद भी सिविल सर्जन ने रक्त नहीं दिया जिससे एक युवती की मौत हो गई है। जहां जिम्मेदारों ने जिला चिकित्सालय की बदहाल व्यवस्था को सुधारने की बजाय पूरे घटनाक्रम का कवरेज कर रहे स्टार समाचार के सिटी रिपोर्टर अरुण गुप्ता सहित अन्य पत्रकारों को ही नर्सों के माध्यम से फंसा देने की धमकी दी गई है।
यह है पूरा मामला
मामला बीते सोमवार की दरमियानी रात 10 बजे का है जहां मझौली तहसील अंतर्गत ग्राम नदहा से द्रोपती गुप्ता पिता यज्ञ नारायण गुप्ता उम्र 24 साल की तबीयत सही नहीं होने तथा ब्लीडिंग जाने के कारण जिला चिकित्सालय में उपचार हेतु आए थे।
बताया गया कि भर्ती का कागज कंप्लीट करवाने के बाद लेबर रूम में उपस्थित  स्वास्थ्य कर्मी रात 12 बजे तक गेट के बाहर बैठा दिए। अधिक रक्त स्राव होने के कारण पीड़ित पिता स्वास्थ्य कर्मियों के सामने गिड़गिड़ाता रहा, लेकिन चंद पैसे नहीं होने की वजह से पीडिता को भर्ती नहीं किए। पीड़ित के पिता ने बताया कि जिसके पास पैसा था उसका उपचार लेबर रूम के अंदर ले जाकर तत्काल चालू कर दिए।
डायल कॉल में कलेक्टर का नंबर देख किया भर्ती
उक्त घटना की जानकारी देने के लिए पीड़ित के पिता द्वारा कलेक्टर को रात में ही फोन किया गया कलेक्टर का नंबर डायल काल में देखते ही वहां उपस्थित स्वास्थ्य कर्मियों ने मरीज को भर्ती किया लेकिन उपचार तब भी चालू नहीं किए।
धमकी पर उतरे सिविल सर्जन
जिला चिकित्सालय की जमीनी हकीकत का पर्दाफाश कर रहे स्टार समाचार के सिटी रिपोर्टर अरुण गुप्ता को धमकाने पर उतर आए सिविल सर्जन द्वारा स्टाफ नर्स अनु पांडे ( परिवर्तित नाम) से छेड़छाड़ का आवेदन लिखवा कर पुलिस कंप्लेन करवाने तक की धमकी दे डाली।
मीडिया कर्मियों के लिए लगाई रोक
जिला चिकित्सालय के सिविल सर्जन का तानाशाही रवैया सामने आया है जहां कवरेज करने के लिए मीडिया कर्मियों को जिला चिकित्सालय में जाने के लिए सिविल सर्जन रोका जा रहा है।
सिविल सर्जन द्वारा जिला चिकित्सालय में तैनात सिक्योरिटी गार्ड को बिना गाइडलाइन के ही निर्देश दिया गया है की कोई भी मीडिया कर्मी जिला चिकित्सालय का कवरेज नहीं करेगा कोई भी मीडिया कर्मी जिला चिकित्सालय के अंदर प्रवेश करने पर सिक्योरिटी गार्ड रोकेगा।
जवाब पूछते सवाल ?
सवाल यह है कि जिला चिकित्सालय की बदहाल व्यवस्था सुधारने की बजाय जिला चिकित्सालय के पर्दाफाश कर रहे पत्रकारों को ही नर्सों के द्वारा फसाने की धमकी क्यों दी गई ? दूसरा सवाल यह है कि स्वास्थ्य विभाग के उच्चाधिकारियों की ऐसी क्या मजबूरी है जो बदहाल व्यवस्था सुधारने की वजह है मीडिया कर्मियों को ही दबाने में लगे हैं ? तीसरा सवाल यह है कि आखिर आम आदमी को जिला चिकित्सालय में सही उपचार कब मिलेगा ? क्या बदहाल व्यवस्था पटरी पर आएगी क्या जिम्मेदार अधिकारी तथा नेताओं के द्वारा अस्पताल के व्यवस्था सुधारने के लिए आगे आएंगे?
इनका कहना है 
यह पूर्ण रूप गलत है कि मीडिया कर्मी जिला चिकित्सालय के अंदर नहीं जायेंगे और खबर जिला चिकित्सालय के अंदर ही जाने से नहीं मिलती है ऐसी खबरें तो बाहर से ही आती है। दूसरी बात किसी को भी गलत करने का कोई अधिकार नहीं है। हम सब आम जनता की सेवा के लिए है और हम सबको यही करना भी चाहिए फिलहाल मैं जांच करवाता हूं।
रवींद्र चौधरी
कलेक्टर, सीधी
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