पदोन्नति में आरक्षण को लेकर सामान्य एवं पिछड़ा वर्ग के कर्मचारियों के मन में घोर निराशा एवं सरकार के प्रति आक्रोश व्याप्त है।
सामान्य पिछड़ा एवं अल्पसंख्यक अधिकारी कर्मचारी संस्था (सपाक्स) सीधी के नोडल अधिकारी डॉ. अरुण सिंह चौहान ने एक विज्ञप्ति के माध्यम से बताया कि विगत दिवस भोपाल में सम्पन्न हुई बैठक में संगठन द्वारा निर्णय लिया गया कि मुख्यमंत्री द्वारा पूर्ववर्ती सरकार के दौरान पदोन्नति में आरक्षण समाप्त कराने एवं मान्यता के मुद्दे पर विचार करने हेतु आश्वासन दिया गया था किन्तु न तो पूर्ववर्ती सरकार ने इस मुद्दे पर कोई ठोस कदम उठाया और न ही वर्तमान सरकार इस विषय पर कुछ करने की दिशा में अग्रसर दिखायी दे रही है।
बैठक में यह विचार भी व्यक्त किया गया कि मुख्यमंत्री द्वारा अपने ट्वीट में यह कहा गया है कि जनरल प्रमोशन से होशियार विद्यार्थी डिप्रेशन के शिकार हो सकते हैं। संस्था का मानना है कि मुख्यमंत्री को प्रदेश के उन हजारों कर्मचारियों की मनःस्थिति का भी अंदाजा लगाना चाहिए जिन्हें पदोन्नति में आरक्षण के कारण अत्यन्त जूनियर कर्मचारियों के अधीन होकर कार्य करना पड़ रहा है।
सपाक्स का मानना है कि नौकरी में आरक्षण मिलने के बाद कर्मचारी का सामाजिक एवं आर्थिक स्तर अन्य कर्मचारियों के बराबर हो जाता है। ऐसी स्थिति में पदोन्नति में भी आरक्षण देना सामान्य एवं पिछड़ा वर्ग कर्मचारियों के प्रति अन्याय एवं समानता के अधिकार का उल्लंघन है।
उच्चतम न्यायालय द्वारा सामान्य एवं पिछड़ा वर्ग की पदोन्नति पर कोई रोक नहीं लगायी गयी है लेकिन सरकार द्वारा आरक्षित वर्ग के साथ सभी वर्गों के कर्मचारियों की पदोन्नति रोक दी गयी जिससे विगत चार वर्षों में हजारों कर्मचारी बिना पदोन्नति के ही सेवानिवृत्त हो गए।
संस्था अपने मुद्दे पदोन्नति में आरक्षण तथा बैकलॉग की गणना के सम्बन्ध में सरकार से यह अपेक्षा करती है कि सामान्य एवं पिछड़ा वर्ग के 64 फीसदी कर्मचारियों के पक्ष में शीघ्र कोई सार्थक निर्णय लिया जाय अन्यथा की स्थिति में इस वर्ग के कर्मचारी अपनी मांगे पूर्ण कराने के लिए हर सम्भव प्रयास करेंगे।