मृत व्यक्ति को जीवित बताकर भूमि को रजिस्ट्री कराने वाला पहुॅचा सलाखों के पीछे

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कृतिका: सीधी 

शहर के जमोड़ी थाने में एक ऐसा प्रकरण आया जहॉ फर्जी तरीके एवं सॉठ-गॉठ कर के जमीन को हथियाने की मंशा से पूर्व में मृत व्यक्ति की जगह अन्य व्यक्ति को सामने खड़ा करके पट्टे की जमीन को हथिया लिया गया।
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उक्त प्रकरण को जमोड़ी थाना प्रभारी अभिषेक सिंह परिहार ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जॉच प्रारंभ की जहॉ परत दर परत रहस्यों के पन्ने खुलने लगे। बताया गया कि आरोपीगण राम अभिलाष द्विवेदी पिता रामविशाल राम द्विवेदी निवासी पडखुरी, श्रीमती सरोज सिंह पति राजबहोर सिंह सेंगर निवासी पडख़ुरी, लालबहादुर सिंह गोंड पिता भगोले सिंह गोंड निवासी इटौही, जगन्नाथ सेंगर पिता राजबहोर सिंह सेंगर निवासी पडखुरी एवं रामलाल कोल पिता लक्ष्मिण कोल निवासी डाडी ने फरियादी नारायण दास गुप्ता पिता रामगोपाल गुप्ता  निवासी पडखुरी की नंबर 01 में स्थित आराजी क्रमांक 238, 350, 1141, 1145 एवं 1146 कुल 05 किता कुल रकवा 1.010 हे. के भूमि स्वामी हीराराम पिता बसुधा राम ब्राम्हण ग्राम पडखुरी नंबर 01 थाना जमोड़ी जिला सीधी के निवासी थे। जिनकी उक्त आराजी पर फरियादी घर बनाकर बसे हुए थे। आरोपीगण ने रजिस्ट्रार एवं रजिस्ट्री लेखक रजिस्ट्री करने वाले शासकीय कर्मचारियों तथा गवाह के साथ मिलकर आरोपी लालबहादुर सिंह को रूपये पैसे का लालच देकर उक्त आराजी का भूमि स्वामी मृतक हीराराम बनाकर उपरोक्त भूमि फर्जी तरीके से कुल रकवा 1.010 हे. रकवा 0.970 हे. क्रय कर अपने अपने नाम रजिस्ट्री करा लिए।
आरोपीगणों द्वारा हीराराम को जीवित बता अन्य व्याक्ति लालबहादुर सिंह गोंड को हीराराम बनाकर फर्जी तरीके से उपरोक्त भूमियों को क्रय कर अपने नाम रजिस्ट्री करा लेना एवं लालबहादुर सिंह गोंड द्वारा हीराराम बनकर भूमि बिक्री करना पाया गया।
फरियादी की शिकायत पर थाना जमोड़ी सीधी में अपराध क्र. 38/2020 पर आरोपीगण के विरूद्ध भादवि की धारा 419, 420 के अंतर्गत मामला पंजीबद्ध किया गया। विवेचना प्रारंभ की गई तथा आरोपीगण को न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी न्यायालय सीधी में प्रस्तुत किया गया, जहां आरोपीगण के अधिवक्ताय द्वारा आरोपीगण के जमानत का आवेदन प्रस्तुत किया गया। जहां शासन की ओर से पैरवी कर रही श्रीमती पूजा गोस्वामी एडीपीओ ने प्रस्तुत जमानत आवेदन का विरोध कर प्रभावी तथ्य रखे। परिणामस्वपरूप न्यायालय द्वारा अभियोजन के तर्क को मान्य कर आरोपीगण द्वारा प्रस्तुत जमानत आवेदन निरस्त कर आरोपीगण को जेल भेजा गया।
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