महँगी बिजली की वजह है, कंपनियों से गैर जरूरी बिजली खरीद समझौता
सीधी: धर्मेन्द्र
टोंको-रोंको-ठोंको क्रांतिकारी मोर्चा के संयोजक उमेश तिवारी ने मई के महीने में विद्दुत उपभोक्ताओं को आये भारी भरकम बिजली बिल और अडानी से किये गैर जरूरी बिजली खरीद करार का विरोध करते हुए कहा है कि अनियोजित लॉकडाउन के इस दौर में सरकारें और निजी कंपनियां अपने काम बडी तेजी से निपटाने में लगी हैं। इसी कड़ी में मध्यप्रदेश सरकार ने अडानी की छिदवाड़ा पेंच थर्मल पावर परियोजना के साथ बिजली खरीद करार किया है इसकी सार्वजनिक जानकारी समाचार पत्रों से 27 मई को मिली जब मध्यप्रदेश सरकार ने सूचना दी।
श्री तिवारी ने कहा कि मध्य प्रदेश में औसत बिजली मांग 9000 मेगावाट और अधिकतम मांग 14500 मेगावाट है जबकि राज्य ने पहले ही 21000 मेगावाट के बिजली खरीद करार पर हस्ताक्षर किए हैं। इन समझौते के कारण बिजली लिये बिना वितरण कम्पनियों को 2000 करोड़ से भी अधिक का भुगतान करना पड़ रहा है। मध्य प्रदेश की सरकार सरकारी बिजली घरों को बंद कर निजी बिजली कंपनियों से ऊँची दरों पर बिजली खरीद रही है नतीजे में मध्यप्रदेश में बिजली के बढते वित्तीय घाटे जनता की जेब पर भारी पड़ रहे हैं।
श्री तिवारी ने बताया कि भारत सरकार के सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यन्वयन मंत्रालय की 2019 की रिर्पोट के अनुसार मध्यप्रदेश मे 20331 मेगावाट बिजली उत्पादन की क्षमता पहले से ही स्थापित है और उसकी मांग 9000 मेगावाट है। इस आधार पर प्रदेश में सरप्लस बिजली उपलब्ध है तो फिर सवाल उठता है की उसके बावजूद ऐसी कौन सी वजह है जिससे मध्यप्रदेश सरकार को अदानी से 1320 मेगावाट बिजली खरीद का करार करना पड रहा है? इस तरह की बिजली खरीद करार का किसको फायदा होने वाला है? और इसके क्या महत्वपूर्ण कारण हैं ?
श्री तिवारी ने कहा कि जब राज्य के पास अगले 10 वर्षों के लिए सरप्लस बिजली मौजूद है तब अडानी बिजली परियोजना के साथ बिजली खरीद का समझौता एक गैर जरूरी समझौता है। इतना ही नहीं अडानी पावर की पेंच थर्मल एनर्जी लिमिटेड के साथ बिजली खरीद का समझौता सासन बिजली परियोजना से भी अधिक महंगा है। सासन की प्रति यूनिट दर 1.194 रु थी जबकि अडानी परियोजाना की प्रति यूनिट दर 4 गुना लगभग 4.79 प्रति यूनिट पड रही है जो कि अब तक की सबसे ऊँची दर पर करार किया गया है। यह मनमानी और बिना पारदर्शिता के किया जा रहा है। यह करार 25 वर्ष की अवधि में 1 लाख करोड रु से भी अधिक का नुकसान राज्य वितरण कपंनी को दे सकता है।
उमेश तिवारी ने कहा कि अडानी परियोजना के साथ बिजली खरीद का समझौता किसी भी नजरिये से सही नहीं है। अडानी के साथ अतिरिक्त बिजली खरीद समझौता आनावश्यक है। यह प्रदेश की जनता पर अतिरिक्त भार डालेगा। इस बिजली खरीद समझौते के अनुसार सरकार को यह भुगतान 25 वर्षों तक करना पड़ेगा। यह प्रदेश की जनता से बिजली के दर बढ़ाकर हजारों करोड़ रूपये वसूले जा सकने का रास्ता खोलेगा।
श्री तिवारी ने बिजली उपभोक्ताओं से कहा है कि वो ज्यादा आये बिजली बिल का भुगतान न करें तथा मध्य प्रदेश सरकार आम जनता को अतिरिक्त वित्तीय बोझ बढने से बचाये और अडानी के साथ किये गये समझौते को सार्वजानिक हित में तु्रन्त रद्द करे तथा ऐसी उन सभी कंपनियों के बिजली खरीद करारों को रद्ध करे जो महंगे और गैर जरूरी हैं।