नहीं रहे अजित जोगी, लंबे समय तक अस्पताल में रहने के बाद दुनिया को कहा अलविदा


कृतिका: सीधी
रायपुर

छत्तीसगढ़ के पहले मुख्यमंत्री अजीत जोगी का शुक्रवार को निधन हो गया। वे 74 साल के थे। लंबे समय से रायपुर के एक अस्पताल में भर्ती थे। दिल का दौरा पड़ने के बाद उन्हें हॉस्पिटल में एडमिट कराया गया था।
19 दिन के अंदर तीसरी बार दिल का दौरा पड़ने के बाद उनकी हालत गंभीर हो गई थी। जाेगी 2000 से 2003 के बीच छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री रहे।
जोगी 9 मई से कोमा में थे। इमली का बीज गले में अटकने की वजह से उन्हें पहली बार दिल का दौरा पड़ा था। इसके बाद 27 की मई की रात भी उन्हें दिल का दौरा पड़ा। उनके निधन की जानकारी उनके बेटे अमित जोगी ने ट्वीट कर दी।

उन्होंने लिखा कि 20 वर्षीय युवा छत्तीसगढ़ राज्य के सिर से आज उसके पिता का साया उठ गया. केवल मैंने ही नहीं बल्कि छत्तीसगढ़ ने नेता नहीं,अपना पिता खोया है. अजीत जोगी ढाई करोड़ लोगों के अपने परिवार को छोड़कर, ईश्वर के पास चले गए. गांव-गरीब का सहारा, छत्तीसगढ़ का दुलारा,हमसे बहुत दूर चला गया.
गॉडफादर अर्जुन सिंह

जोगी कांग्रेस में अर्जुन सिंह की पसंद से आए थे. ये वो वक्त था जब राजीव ओल्ड गार्ड्स को ठिकाने लगा नई टीम बना रहे थे. एमपी से दिग्विजय सिंह उनकी लिस्ट में थे. छ्त्तीसगढ़ जैसे आदिवासी इलाके के लिहाज से जरूरत लगी एक नए लड़के की. जो शुक्ला ब्रदर्स को चुनौती दे सके. इस तरह अर्जुन सिंह की नजर गई जोगी पर. एक तेज तर्रार आईएएस. जो बोलता भी बहुत था. काम भी करता था. कांग्रेस जॉइन करने के बाद अजीत की गांधी परिवार से नज़दीकियां बढ़ती रहीं. अजीत जोगी सीधी और शहडोल में लंबे समय तक कलेक्टर रहे. जहां के अर्जुन सिंह का उस वक़्त मध्यप्रदेश में सिक्का चलता था.
अजीत जोगी ने हवा का रुख भांप अर्जुन को अपना गॉडफादर बना लिया. बड़ा हाथ सिर पर आया तो अजीत खुद को पिछड़ी और अतिपिछड़ी जातियों का नेता मानने लगे. इतने बड़े कि जो दिग्विजय सिंह उन्हें राजनीति में लाए थे, उनके ही खिलाफ मोर्चा खोल दिया. 1993 में जब दिग्विजय सिंह के सीएम बनने का नंबर आया तो जोगी भी दावेदार थे. दावेदारी चली नहीं. पर दिग्विजय जैसा एक दोस्त दुश्मन जरूर बन गया.

1999. केंद्र में अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व में एनडीए आई. छोटे राज्यों की मांग ने जोर पकड़ी. बीजेपी खुद छोटे राज्यों की समर्थक. जून 2000 आते-आते तय हो गया कि देश में तीन नए राज्य बनेंगे. इनमें एक था मध्यप्रदेश से अलग होकर बनने वाला छत्तीसगढ़. 1924 में कांग्रेस के त्रिपुरी अधिवेशन में पहली बार इसकी मांग उठी थी. जुलाई2000 में पूरी हो सकी. ये अलग होने की प्रक्रिया 31 अक्टूबर 2000 तक चली. पूरा मध्यप्रदेश बेचैनी में डूबा रहा. बेचैनी स्वाभाविक भी थी. 44 साल से उनसे जुड़ा ज़मीन का एक बड़ा हिस्सा अगल हो रहा था. और ज़मीन के इस टुकड़े के साथ विदाई ले रहे थे 90 विधायक.


श्यामाचरण शुक्ल, विद्याचरण शुक्ल, राजेंद्र शुक्ल, मोतीलाल वोरा. ये सब हो गए छत्तीसगढ़ के. अब इनमें से मुखिया कौन हो? सबसे आगे थे कांग्रेस नेता विद्याचरण शुक्ला. छत्तीसगढ़ राज्य संघर्ष मोर्चा बना लिया. ताकत दिखाने के लिए12 विधायक समेत पर उतरे. चर्चा यहां तक फैली कि वो मुख्यमंत्री बनने के लिए बीजेपी का सपोर्ट ले सकते हैं. बीजेपी को भी शुक्ल में विभीषण नजर आ रहा था. दूसरी तरफ जोर लगाए थे एमपी के पूर्व सीएम मोतीलाल वोरा.
झगड़ा खत्म करने के लिए कांग्रेस हाइकमान ने कहा – छत्तीसगढ़ की पुरानी मांग पूरी करो – आदिवासी सीएम बनाओ. अब प्रमाणपत्र अजीत के पास अनुसूचित जनजाति वाला है. लेकिन इस पर सालों विवाद चला है. कभी कोर्ट उनके खिलाफ फ़ैसला देती, कभी जाति छानबीन समिति की जांच होती. लेकिन 2018 के सितंबर में सुप्रीम कोर्ट ने छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट का फ़ैसला पलट दिया कहा, अजीत जोगी आदिवासी ही हैं.
खैर, 2018 से वापस 2000 चलते हैं. आदिवासी सीएम की मांग को पूरा कर कांग्रेस अपने गढ़ को बचाए रखना चाहती थी. ऐसे लॉटरी खुली अजीत जोगी की. अब सीन ये था कि जोगी को विधायक दल का नेता बनाने के लिए चाहिए था दिग्विजय का समर्थन. क्योंकि विधायक उन्हीं के सगे थे. एक वक्त था जब दिग्विजय ने जोगी के सीएम बनने की भविष्यवाणी की थी. लेकिन अब दोनों में 36 का आंकड़ा था. हाइकमान ने इसका ये इलाज निकाला कि दिग्विजय को ही आधिकारिक तौर पर जोगी का नाम आगे बढ़ाने और जिताने का ज़िम्मा दे दिया. दिल्ली में अब तक कांग्रेस हाइकमान का मतलब सोनिया गांधी होने लगा था. और दिग्विजय उन्हें नाराज़ नहीं करना चाहते थे. तो उन्होंने दुश्मनी पोस्टपोन कर दी. 31 अक्टूबर 2000 को अजीत जोगी छत्तीसगढ़ के पहले मुख्यमंत्री बन गए.
अजय सिंह ने श्री अजीत जोगी के निधन पर शोक व्यक्त किया

मध्यप्रदेश के पूर्व नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह राहुल ने छत्तीसगढ़ के प्रथम मुख्यमंत्री श्री अजीत जोगी के निधन पर शोक व्यक्त किया है।
श्री सिंह ने कहा कि श्री अजीत जोगी जी के निधन का समाचार अत्यंत दुःखद है। सीधी के कलेक्टर रहते हुए वे पूज्य दाऊ सा के संपर्क में आकर उनके विश्वस्त बन गए और बाद में आय ए एस की सरकारी नौकरी छोड़कर राजनीति में आकर उनके निकट सहयोगियों में से रहे। संयुक्त मध्यप्रदेश में राजनीति में उनका महत्वपूर्ण योगदान था । उनका अवसान मेरे लिए व्यक्तिगत क्षति है जिसकी पूर्ति होना संभव नहीं है । परमात्मा दिवंगत आत्मा को अपने चरणों में स्थान दे तथा शोकाकुल परिजनों को यह आघात सहने की सामर्थ्य प्रदान करे
