2 वर्ष बाद लाक डाउन में भी तेदूपत्ता के गरीब हितग्राहियों को बोनस के लाले, पंचायतों का मजदूरी भुगतान भी शेष

0 188
Main Ad1

सीधी
प्रदेश सरकार गरीबों के लिये एक तरफ पंचायतों में रोजगार की व्यवस्था कर रही है जिससे गरीबों के पालन पोषण में लाक डाउन का कोई असर न पड़े, उनका भी परिवार किसी तरह इस महामारी से बचा रहे किन्तु प्रशासन यह बात भूल रहा है कि रोजगार गारंटी में कराये गये कार्यो की मजदूरी अभी बांकी है और नये कार्य आरंभ कर दिये गये हैं।
Main Ad1
गांव के गरीबों का कहना है कि सरकार कुसमी में तेदूपत्ता का बोनस नहीं दे पाई है। शायद प्रशासन इन गरीबों को पैसा देना भूल चुकी है लेकिन तेंदूपत्ता तोड़ने वाले हर हितग्राही आदिवासी या मजदूर बोनस के लिये आश लगाये बैठै हैं ऐसे में सत्ताधारी एवं विपक्षी दल के नेताओं को इन गरीबों के लिये परैवी करनी चाहिये।
एक नजर इस पर
बता दें कि कुसमी एक आदिवासी बाहुल्य क्षेत्र है। यहां कि जनता महुआ या फिर तेदूपत्ता से ही अपने एक साल का बन्दोबस्त करती है। मगर इस वर्ष महुआ फूल में इनको मनचाहा मुनाफा नहीं मिला। उसका प्रमुख कारण लाक डाउन में घर से बाहर न निकलना ही लोग मान रहे हैं। दूसरा तेदू के पेड़ में इन दिनो कोई खास पत्तियां नहीं निकल पाई हैं।लेकिन जो पत्ता तोड़ चुके हैं वो श्रमिक उसके बोनस के लिये आश लगाये बैठे हैं।
बुद्धजीवियों का मानना है कि शासन प्रशासन द्वारा अनाज की व्यवस्था तो किसी तरह कर दी जाती है पर परिवार बड़ा होने के कारण प्राप्त राशन पर्याप्त नहीं होता और महीने भर नहीं चलता साथ ही कपड़े सहित अन्य छोटे कार्य व आवश्यकताओं की पूर्ति के लिये यही तेंदूपत्ता से प्राप्त पारिश्रमिक ही इनका प्रमुख श्रोत है। जिसे प्रशासन ने नजर अंदाज कर दिया है। लाक डाउन के कारण क्षेत्र में स्थिति तो किसी तरह चल रही है किन्तु पंचायतों में बाकी मजदूरी भुगतान तथा तेदूपत्ता वोनस पर भी शासन प्रशासन को गौर करने की आवश्यक्ता है यदि ये भुगतान शीघ करा दिये जायें तो इस वनांचल क्षेत्र के रहवासियों की रोजमर्रा की व्यवस्था पटरी पर लायी जा सकती है
News TOP Footer