शिवराज सरकार द्वारा लाए गए मंडी अध्यादेश को निरस्त करने की माग को लेकर व्यापारी मण्डी बोर्ड के अध्यक्ष ने सौंपा ज्ञापन –

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कोरोना महामारी के बीच इस वर्ष किसानों की उपज को खरीदने और उन्हें उनकी उपज का उचित मूल्य दिखाने के लिए मध्य प्रदेश की सरकार ने कई कदम उठाए हैं उसी तारे क्रम में मध्य प्रदेश की सरकार ने किस उपज मंडी अधिनियम 1972 संशोधन अध्यादेश को लाकर किसानों को उनकी फसल को उनके मर्जी के मुताबिक बिक्री करने की भी सुविधा प्रदान की है किसानों को दी गई इस सुविधा को लेकर अब तक किसानों के साथ काम करते आ रहे हम्माल तुलावटी व्यापारी मंडी बोर्ड के कर्मचारियों द्वारा इसे किसान हितकारी नही होने की बात कही जा रही है 6 मई को सीधी के व्यापारियों मंडी बोर्ड के कर्मचारियों हम्मालो और तुलावाटियो के एक प्रतिनिधिमंडल ने जिले के अपर कलेक्टर से मिलकर उन्हें मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह के नाम का एक ज्ञापन सौंपा जिसमें यह बात कहीं गई है कि सरकार द्वारा लाया गया किस उपज मंडी अधिनियम 1972 संशोधन अध्यादेश हितकारी नहीं है जिसे निरस्त किया जाए जिले के एडिशनल कलेक्टर डीपी बर्मन को अपना ज्ञापन सौंपने के बाद व्यापारियों ने बताया कि मंडी अधिनियम 1972 के प्रावधानों की भांति नए संशोधन एक्ट को भी मंडी समितियों के नियंत्रण में रखा जाए तथा 1 मई 2020 को जारी आदेश को निरस्त किया जाए प्राइवेट मंडी या निजी क्रय केंद्रों में किसानों की कृषि उपज के आवक एवं विक्रय एवं भुगतान होने तक शासकीय मंडी कर्मचारियों के प्रत्यक्ष निगरानी में हो इसके साथ ही ज्ञापन में इस बात का भी उल्लेख है कि यदि सरकार हमारी मांगों पर विचार नहीं करेगी तो हम अपने हितों की रक्षा के लिए लाक डाउन के बाद मॉडल एक्ट के विरोध में हड़ताल करने के साथ.साथ सड़कों पर उतरने को मजबूर होंगे इसके साथ ही ज्ञापन सौंपने वाले मंडी बोर्ड के अधिकारियों ने मीडिया को अपनी मांगों की जानकारी दी।

 

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