मुंबई से पैदल गांव आ रहे मजदूर की रास्ते में मौत


सीधी
महाराष्ट्र के मुंबई से पैदल चलकर सीधी आ रहे एक दिहाड़ी मजदूर की रास्ते में मौत हो गई है।
रोजी रोटी की तलास में ज्यादातर सीधी के मजदूर दुसरे राज्य में पलायन कर अपना गुजर बसर करते हैं। माह भर से अधिक हुये लाकडाउन की वजह से दूसरे राज्य में मजदूरी कर अपना गुजारा कर रहे लोगों की मुसीबतें अब बढ़ने लगी है। ऐसे में मजदूर पैदल ही चलकर अपने घर पहुँचने का फैसला ले रहे हैं।
जिले के हटवा गांव का है निवासी

सीधी के हटवा गाँव के निवासी मोतीलाल साहू अपने इलाके के तकरीबन दो दर्जन लोगों के साथ मुम्बई में रहकर मजदूरी का काम कर अपना और अपने परिवार का गुजारा कर रहा था, ऐसे में कोरोना की वजह से हुये लाकडाउन में यह सब श्रमिक मुम्बई में फनसे हुये थे, सभी श्रमिको ने वहां से सीधी पैदल चलकर आने का फैसला लिया।
मुंबई से डेढ़ सौ किलोमीटर दूरी पर हुई मौत
बीते 23 अप्रैल को सुबह जिस वक्त ये सभी मजदूर गाँव और जंगल के रास्ते होते हुये सीधी आ रहे थे तो मुम्बई से 150 किलोमीटर दूरी तयकर जब वो एक गाँव के किनारे पहुँचे तो सभी श्रमिक ने खाना और पानी की तलाश करने लगे लेकिन वहां पानी बस मिला खाना नहीं मिल सका। भूखे पेट पानी पीते ही मृतक मोतीलाल साहू कि हालत बिगड़ने लगी ऐसे में साथ में मौजूद श्रमिकों ने ग्रामीणों के सहारे उन्हें उपचार के लिये नजदीकी स्वस्थ्य केंद्र में भर्ती कराया गया जहाँ उपचार के दौरान मोतीलाल साहू की मौत हो गई। मृतक के पोस्टमार्टम पँचनामा उपरांत शव निजी एम्बुलेंस वाहन से सीधी लाया जा रहा है। मृतक के भाई का आरोप है की उनके भाई एक माह से वहाँ लाक डाउन में फंसे थे, खाने पीने का कोई इंतिजामात नहीं था, ऐसे में पैदल चलकर 40 से 50 लोग सीधी आ रहे थे, लगातार भूख और प्यास की वजह से आचानक तबियत बिगड़ गई, उपचार के लिये अस्पताल ले जाया गया जहां उपचार के दौरान मौत हो गई है।
नहीं मिली सरकारी मदद
मोतीलाल साहू की मौत के उपरांत उनके शव को लाने के लिये सरकारी शव वाहन नहीं मिल सका, ऐसे में 35 हजार रुपये किराये से शव वाहन बुक कर मृतक के शव को सीधी लाया जा रहा है।
