जलियांवाला बाग हत्याकांड 13 अप्रैल 1919 भारतीय इतिहास का सबसे काला दिन-

इस समय कोरोना नामक महामारी इतनी ज्यादा फैली हुई है कि इसका कहीं अंत दिखाई नहीं दे रहा और इसी कशमकश में हम एक बहुत ही महत्वपूर्ण तारीख या कहें कि भारतीय इतिहास का एक बहुत ही काला दुखद दिन 13 अप्रैल सन 1919 को हम लगभग भूल से गए
आज 13 अप्रैल 2020 इस घटना को हुए 101 वर्ष पूर्ण होते हैं लेकिन जब भी जलियांवाला बाग हत्याकांड नाम का शब्द सुनाई देता है तो आंखों के सामने वही अनगिनत पड़ी हुई लाशें जो जनरल डायर कि गोलियां से भून दी गई थी वह आ जाती है; ना चाहते हुए भी मन क्रोधित हो उठता है और अंतर्मन में एक ज्वाला सी जलती है

13 अप्रैल 1919 का दिन था rowlatt act के विरोध में कुछ नेताओं को बंदी बना लिया गया था जिन्हें रिहा करवाने के लिए पंजाब पंजाब के जलियांवाला बाग में कुछ लोग एकत्रित हुए और उन नेताओं को रिहा करवाने के लिए शांतिपूर्ण ढंग से प्रदर्शन करने लगे और उसी समय जनरल डायर जो कि उस समय एक अंग्रेज़ अधिकारी था कुछ हथियारबंद सैनिकों के साथ उस बाग में आया और बिना किसी अग्रिम चेतावनी के दनादन गोलियां चलाने का आदेश दे दिया और वहां पर देखते ही देखते लाशों का ढेर लग गया न जाने उनमें कितनी स्त्रियां थी कितने पुरुष थे और कितने अबोधबालक थे यह हमारा भारत वास्तव में बहुत महान है बहुत संघर्ष देखा है इसने बहुत विपरीत परिस्थितियां देखी है और तब जाकर के आज यह जहां तक पहुंचा है
Naveen network city channel सीधी 13 अप्रैल 1919 को शहीद हुए समस्त स्वतंत्रता पुजारियों को नमन करता है और आभार व्यक्त करता है की उन्हीं की बदौलत आज भारत एक स्वतंत्र राष्ट्र बन पाया और विश्व में अपनी अलग छवि बना पाया
धन्यवाद्…।
