आरटीओ ऑफिसर की रजामंदी से विभाग में है रामराज्य


?मजाल क्या आरटीओ आफिसर पर कोई एक्सन लें
?तानाशाही रवैया अपनाने के बाद भी वरिष्ठ अधिकारी कार्यवाही करने से कर रहे परहेज

आर.बी. सिंह राज। सीधी
जिले में परिवहन विभाग को लेकर इन दिनों काफी चर्चाएं हैं। पडऱा में संचालित आरटीओ आफिस में पदस्थ परिवहन अधिकारी के खिलाफ मजाल क्या कि कोई एक्शन ले। दरअसल इन दिनों आरटीओ ऑफिस में बतौर ऑफिसर महिला परिवहन अधिकारी होने का वे भरपूर फायदा उठा रही हैं। स्थिति यह है कि उनके द्वारा विभागीय अमले से भरपूर वैध के साथ-साथ अवैध काम तो लिया ही जा रहा है वहीं नियमों को दरकिनार कर वाहन संचालन करने वालों पर विभाग द्वारा कोई कसावट नहीं की जा रही है।
परिवहन अधिकारी का स्थानांतरण बीते कुछ माह पहले हुआ था लेकिन उनका सीधी से इतना मोह हुआ कि वे अपना स्थानांतरण भी स्थगित कराने में सफल रही हैं। नतीजा यह है कि वाहन चालक तो कमीशन खोरी में परेशान हैं ही वहीं नियमों को धता बताते हुए वे मनमानी पर उतारू हैं। जिले में बस सेवा ही एक मात्र परिवहन का साधन है जिसके द्वारा सर्वाधिक यात्रियों का आना-जाना होता है। इसके वावजूद भी सडक़ों पर नियमित दौड़ रही बसों में निर्धारित नियमों का पालन नहीं किया जा रहा है। जहां कई बस मालिक परमिट फिटनेस व बीमा जैसे महत्वपूर्ण दस्तावेज भी नहीं बनवाते हैं वहीं सुविधाओं के अभाव में यात्रियों को परेशानी झेलनी पड़ती है। सडक़ों पर बसें दिन-रात फर्राटा भरते दौड़ रही हैं। जबकि जिम्मेदार विभाग के नुमाइंदे अवैध वसूली कर अपनी जेब भरने में लगा रहते हैं। लिहाजा नियम विरूद्ध दौड़ रही बसों पर कार्रवाई नहीं की जाती है।
?खटारा बसें भी दौड़ रहीं सड़कों पर
गौरतलब है कि जिले में सैकड़ों बसों का आना-जाना बना रहता है। सडक़ों पर दिन-रात दौड़ रही अधिकांश बसें नियमों को ताक पर रखकर दौड़ाई जा रही हैं। सडक़ों पर चल रही इन बसों में से करीब 15-20 बर्ष से चल रही हैं। जिनके पास निर्धारित नियम के अनुसार केाई दस्तावेज नहीं है ऐसी बसें सडक़ों पर चलते-चलते अधूरी यात्रा में ही खराब हो जाती हैं जिससे सवारियों को काफी परेशानी झेलनी पड़ती है। उनके अलावा शहर सहित ग्रामीण क्षेत्रों की ओर चलने वाली बसों में यात्रियों के लिये आवश्यक सुविधाओं का अभाव है। इस कारण यात्रा पर जाने वाले सवारियों को इन बसों से यात्रा करना कष्टकारी साबित हो रहा है। फिर भी इन बसों के विरूद्ध आरटीओ ऑफिस के जिम्मेदार ऑफिसर कार्रवाई न करके बस संचालकों से अवैध वसूली करने में लगे हुये हैं।
?फ्रस्टेड बाक्स का अभाव
नियमित सडक़ों पर दौड़ रही बसों में चिकित्सकीय सुविधा उपलब्ध नही है। प्राय: देखा गया है कि किसी भी सवारी को साधारण चोंट लग जाने पर उसे प्राथमिक चिकित्सा के रूप में मलहम पट्टी आदि तक नहीं मिल पाती है। ऐसी स्थिति में मरीज को प्राथमिक चिकित्सा के लिये अस्पताल या निजी क्लीनिक में जाना पड़ता है। जिसके चलते मरीजों को घंटों तक प्राथमिक उपचार नहीं मिल पाता और वह कष्ट झेलता रहता है।
?परमिट कहीं की चल रही कहीं और
जिले की सडक़ों पर दौड़ रही बसों में कई बस संचालकों के पास परमिट कहीं दूसरे क्षेत्र का मिला है जबकि उन बसों का आवागमन किसी अन्य क्षेत्र में हो रहा है। ऐसे बस संचालकों के पास सीमित दूरी की यात्रा पर जाने की परमिट दी गई है फिर भी ये बस संचालक विभागीय सांठगांठ से मनमानी करने पर उतारू हैं। जिन्हें 50 किमी दूरी तय करने का परमिट मिला है, ऐसी बसें 100 किमी तक की यात्रा नियमित करती देखी जा रही हैं।
?ओव्हरलोडिंग की समस्या
जिले की सडक़ों पर बड़ी बसों से लेकर नई बसें भी चल रही हेें। सडक़ों पर दौड़ रही बसों में ओव्हरलोडिंग की समस्या सदैव बनी रहती है। जहां 60 सीटर, 52 सीटर या अन्य छोटी बसों में क्षमता से दुगुना सवारियों को भरकर बसों को सडक़ों पर दौड़ाया जा रहा है। ओव्हरलोडिंग के चलते कई बार बसों की दुर्घटनाएं होती रहती हैं। जिसके कारण कई लोगों की मौत भी हो जाती है। दुर्घटना की स्थिति में बसों में इमरजेंसी गेट या तो जंग लग जाने के कारण नही खुलते हैं या कई बसों में इमरजेंसी गेट लगे ही नही होते। जिसके चलते दुर्घटना की स्थिति में घायलों को निकलने या निकालने में समस्या होती है।
?महिलाओं, दिव्यांगों के लिये नहीं है व्यवस्था
नियमित संचालित बसों में महिलाओं और दिव्यांगों के लिये सीटें सुरक्षित नहीं की जाती हैं। जिसके चलते महिलायें व दिव्यांग परेशानियों का सामना करते देखे जाते हैं। बता दें कि महिलाओं के लिये बस में कुल सीटों के हिसाब से 5 या 7 सीटें आरक्षित की जानी होती है जो सीट क्रमांक 1 से 5 या 1 से 7 तक होनी चाहिए। इसके अलावा दिव्यांग व्यक्तियों के लिये भी सीट का आरक्षण किया जाना चाहिए। इन सभी नियमों का पालन न करके बस परिचालक द्वारा मनमानी रूप से अन्य सवारियों को आरक्षित सीटों पर बैठा दिया जाता है। जिसके चलते महिलाओं और दिव्यांगों को पीछे या खड़े होकर यात्रा करनी पड़ती है।
?विभाग में चलती है लिपिकों की दलाली
विभाग में परिवहन अधिकारी के चहेते बने कुछ लिपिक बिचौलियों की भूमिका निभा रहे हैं। इन लिपिकों के मार्फत ही वाहन मालिकों द्वारा आरटीओ अधिकारी तक रकम की चढ़ौत्तरी की जाती है। यह बात किसी से छिपी नहीं है कि इस मामले में संबंधित लिपिक कौन हैं, वाहन मालिक भी ऐसे लिपिक अधिकारी से परेशान हैं। इन सबके बावजूद भी जि मेदार अधिकारी मामले को जानते हुए भी कार्यवाही करने से परहेज कर रहे हैं।
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