कोरोना महामारी के संकट में मनरेगा के माध्यम से गांवों में ही मिल रहा है सभी को रोजगार

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सीधी धर्मेंद : कोरोना महामारी के संकट में एक ओर जहां बड़े शहरों में रोजगार का संकट है, वहीं ग्रामीण क्षेत्रों में मनरेगा के माध्यम से लोगों को रोजगार मिल रहा है। ग्रामीण जनों को अपनी आजीविका के लिए भटकना नहीं पड़ रहा है। उन्हें अपने गांव में ही काम के अवसर मिल रहे हैं। गांवों में स्थायी परिसंपत्तियों का निर्माण हो रहा है, जो भविष्य में ग्रामीण क्षेत्रों में विकास का मार्ग प्रशस्त करेंगी। सीधी जिले में कलेक्टर रवींद्र कुमार चैधरी के मार्गदर्शन में कार्यपालन यंत्री ग्रामीण यांत्रिकी सेवा हिमांशु तिवारी की देख रेख में सभी ग्राम पंचायतों में अधिक से अधिक श्रम मूलक कार्यों को प्रारम्भ किया जा रहा है, जिससे अधिकाधिक श्रमिकों को रोजगार प्राप्त हो सकेगा। 30 अप्रैल की स्थिति में जिले की 400 ग्रामपंचायतों में  3 हजार 515 कार्यों के माध्यम से  35 हजार 951 श्रमिकों को रोजगार उपलब्ध कराया गया है। जनपद पंचायत कुसमी में 702 कार्यों में 4 हजार 526 श्रमिकों को, मझौली में 351 कार्यों में 6 हजार 178 श्रमिकों को, रामपुर नैकिन में 846 कार्यों में 8 हजार 101 श्रमिकों को, सीधी में 964 कार्यों में 8 हजार 935 श्रमिकों को तथा सिहावल में 652 कार्यों में 8 हजार 211 श्रमिकों को रोजगार उपलब्ध कराया गया है। जिले में तालाब जीर्णोद्धार, नवीन तालाब, खेत तालाब, डग पॉंड, गौशाला, चेक डैम, सुदूर सड़क, नाली निर्माण, प्रधानमंत्री आवास के कार्यों में प्रमुखता से श्रम नियोजन किया जा रहा है। कार्य स्थल पर कोविड-19 के संक्रमण की रोकथाम की आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित की गई हैं। सभी श्रमिकों का कार्य स्थल पर मास्क लगाकर आना अनिवार्य है। कार्यस्थल पर साबुन पानी व सेनेटाइजर की व्यवस्था भी होती है। एक ही जगह में कम से कम श्रमिकों को इस प्रकार लगाया जाता है कि 2 गज की दूरी बनी रहे। खराब स्वास्थ्य वाले श्रमिकों को आइसोलेट कर उनका स्वास्थ्य परीक्षण भी कराया जाता है, जिससे कोविड संक्रमण की रोकथाम हो तथा अन्य लोगों की आजीविका भी प्रभावित नहीं हो।

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