कबाड़ में आई पुस्तकों को लेकर नैनीताल में क्यो मशहूर हो गया काम पढ़ा लिखा मामू कबाडी

सीधी धर्मेंद : नैनीताल से हमारी विशेष रिपोर्टर हिमानी रौतेला ने एक ऐसी खबर भेजी है जिससे समाज को एक संदेश जाता है कि इंसान बहुत पढ़ा लिखा ना भी हो अगर उसकी सोच और उसके विचार अच्छे हो तो वह शिक्षा के क्षेत्र में भी खुद ना पढ़ लिख कर भी दूसरों को आगे बढ़ाने के लिए प्रेरित कर सकता है नैनीताल के रहने वाले मामू कबाड़ी ऐसे ही एक शख्स हैं जिनको स्कूली शिक्षा कम होने के बावजूद ये हर स्तर की किताबों के बारे में पूरी जानकारी रहती हैण् उनके स्टोर में रखी कौन सी किताब किसके मतलब की है इन्हें ठीक से मालूम है कबाड़ के साथ किताब खरीदते समय उनकी जानकारी इतनी अपडेट रहती है कि इन्हें पता होता है कौन सी किताब अभी कोर्स में चल रही है और कौन सी अब कोर्स से बाहर हो चुकी हैण् खरीदते समय ही किताबों को अलग छांटते हुए वे काम की किताबें एक तरफ कर शेष को रद्दी के भाव खरीद लेते हैं और जो किताब उन्हें जंचती है यानि पाठक इन्हें खरीदेंगे उसे अलग कर उसका दाम तय करते हैं ग्राहकों को छपे मूल्य की आधी कीमत पर पुस्तक मिलने से यह एक लोकप्रिय अड्डा बन चुका है 32 सालों से ये काम कर रहे मामू कबाडी को आज नगर का बच्चा.बच्चा जानता है इनकी उम्र 60 साल हो गई है।
