सीधी में सड़कों में सब्जी का ठेले चला कर अपना और अपने परिवार का पेट भरने को मजबूर हैं लॉ का स्टूडेंट

सीधी धर्मेंद : देश में लगातार बढ़ रही महंगाई रूपी समस्या ने आम जनता का जीना मुश्किल कर दिया है एक तरफ लोगों की रोजी.रोटी पर संकट है वहीं महंगाई और बेरोजगारी की वजह से लोगों की घर गृहस्ती और जीवन यापन मुश्किल हो रही है हाल ही में कोरोना की मुसीबत से बच कर बाहर आए लोगों को अब डीजल पेट्रोल रसोई गैस की महंगाई के साथ अन्य कई तरह की महंगाई का सामना करना पड़ रहा है ऐसे में लोग अब अपनी घर गृहस्ती कैसे चलाएं जब सरसों का तेल ₹160 लीटर डालडा ₹120 लीटर रसोई गैस 820 में और अन्य कई वस्तुएं जो आम आदमी की पहुंच से बाहर होने लगी है ऐसे में सीधी शहर में बेरोजगार पढ़े.लिखे लोग सड़कों में सब्जी के ठेले चला कर अपना और अपने परिवार का पेट भरने को मजबूर हैं इसी तरह के एक बेरोजगार युवक रमई साहू को अपनी जिम्मेदारियों के बोझ और परिवार की भूख से सामना करना पड़ रहा है जिसके लिए वह जिले के मझौली से आकर सीधी शहर की सड़कों पर सब्जी बेचने को मजबूर है एन टीवी इंडिया न्यूज़ ने जब उस पढ़े.लिखे बेरोजगार सब्जी का ठेला गली.गली घुमा कर बेच रहे नवयुवक से बात की तो उसने अपनी पीड़ा बताते हुए कहा कि वह लॉ का स्टूडेंट है लेकिन उसे अब अपने परिवार का पालन पोषण करने के लिए शहर में आकर ठेले में सब्जी बेचने पड़ रही है आगे उसने बताया कि इस महंगाई में उसने ₹ 700 की सब्जी खरीदी लेकिन उसका धंधा नहीं चल रहा है और उसकी पूंजी भी नहीं निकली है ऊपर से उसे ठेले का किराया घर का भाड़ा और नगरपालिका की बैक की भी देनी पड़ रही है बेरोजगार नवयुवक की बातें झकझोर देने वाली हैं। विगत महीनों से डीजल पेट्रोल के दाम बढ़ने के बाद महंगाई ने विकराल रूप ले लिया है ऐसे में अब लोगों की आर्थिक स्थिति गड़बड़ा रही है ऐसे में जो बेरोजगार हैं उनके लिए संकट अब और बड़ा हो गया है और लोग किसी तरह जीवन यापन को मजबूर हो गए हैं बेरोजगारों की शिक्षा गौण हो गई है दबी जुबान में कुछ बेरोजगारों ने यहां तक कहा कि यदि हमें पता होता कि इतना समय पैसा बर्बाद करने के और इतनी शिक्षा हासिल करने के बाद हमें इस तरह के कामों को करना पड़ेगा तो शायद हम इस पर पुनर्विचार करते बहरहाल देश की इस समस्या को देश के उन कर्णधारो को चिंतन करना चाहिए जो देश के लोगों के भविष्य का ठेका लेते हैं और बेरोजगार युवकों को बड़े.बड़े सपने दिखाते हैं।
