कोरोना के बीच फीका रहा कजलियों का त्योहार

0 180
Main Ad1

कृतिका सीधी :

श्रावण महीना लगते ही प्रकृति में हरियाली छा जाती है कजलियां इस बात का प्रतीक हैं कि खेतों में हरियाली और घरों में सुख समृद्धि रहे आपसी मनमुटाव व भेदभाव को मिटाकर मेल जोल बढ़ाने के लिए कजलियां का पर्व मनाया जाता है जिसका ग्रामीण क्षेत्रों में आज भी महत्व बरकरार है। यह परंपरा मंदिरों में भगवान को कजलियां अर्पित करने के बाद शुरू होती है जिसके बाद लोग एक.दूसरे के घरों में कजलियां देने जाते हैं। कजलिया सुख बांटने मित्रता बढ़ाने और दुख को भुलाने के लिए प्रारंभ हुई इस त्योहार पर लोग कामना करते हैं कि उनके बीच संबंध हमेशा मधुर बनें रहें। ऐसी किवदंती है कि साल भर में कई बार लोगों के बीच मनमुटाव पैदा होता है वे इस त्योहार पर एकण्दूसरे को कजलियां देकर बुराइयों को दूर करते हैं। 4 अगस्त को सीधी शहर में भी काजलियो का त्यौहार मनाया गया लेकिन कोरोना की वजह से लोग अपनों तक ही सीमित रहे और आपस में ही कजलियो का त्यौहार का मना कर बीते दिनों के मनाए त्यौहार को याद किया तो इस बर्ष का त्यौहार उन्हें फीका लगा।

 

Main Ad1

एनटीवी इंडिया न्यूज़

खबर जरा हट कर –

 

News TOP Footer