निजी विद्यालय संचालक नहीं दे रहे शिक्षकों को वेतन

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अधिकतर स्कूलों के संचालको के खिलाफ मिल रही है शिकायतें

सीधी: धर्मेन्द्र

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कोरोना की वजह से लाकडाउन के कारण स्कूलें बंद होने की वजह से अधिकतर स्कूल संचालक भले ही शिक्षकों को तीन माह का वेतन न देने का निर्णय लिये हैं लेकिन अभिभावकों से छात्रों के फीस की वसूली कर रहे हैं।
इस मामले को लेकर स्थानी तौर पर स्कूल प्रशासन द्वारा कोई पहल नहीं की जा रही है। छात्रों से छुट्टी के दौरान फीस तो लिया जा रहा है लेकिन निजी स्कूल के संचालक शिक्षकों का वेतन नहीं दे रहे हैं। इस पर जांच की जाये तो कई विद्यालय के संचालक कठघरे में आ सकते हैं।
उल्लेखनीय है कि 13 मार्च के बाद स्कूलों की छुट्टी करने का फरमान प्रदेश सरकार द्वारा किया गया था। इस दौरान कई निजी स्कूल के संचालकों ने आधी-अधूरी परीक्षाएं ली थीं इसके बाद अवकाश की घोषणा होने के बाद विद्यालय बंद कर दिया गया जो कि अब निरंतर विद्यालय बंद हैं।
इन सबके बावजूद भी विद्यालय प्रबंधक द्वारा नियमों को दरकिनार कर अभिभावकों से फीस लेने के लिए बाध्य किया जा रहा है। देखा जाये तो शासन ने भी जो दिशा-निर्देश दिया है उसके तहत ट्यूशन फीस तीन महीने लेने के लिए आदेश दिया है। इस आदेश में अभिभावकों पर सरकार द्वारा कोई रहम नहीं बरती गई है। ट्यूशन फीस का मतलब कोई रियायत नहीं मानी जा सकती है। विद्यालय प्रबंधकों द्वारा पहले ही किस्त के अनुसार राशि तय कर के अभिभावकों से फीस की वसूली की जाती रही है। ऐसे में ट्यूशन फीस लेने का जो हथकंडा शासन द्वारा दिया गया है उसका कोई मायने समझ में नहीं आ रहा है।
इसी का फायदा उठाते हुए निजी विद्यालय के संचालकों द्वारा फीस में कोई रियायत न देने का निर्णय लिया है। भले ही 15 मार्च से लेकर अब तक विद्यालय संचालित नहीं हैं लेकिन छात्रों से फीस यथावत ली जा रही है। जबकि अधिकतर निजी विद्यालय के संचालकों ने लाकडाउन का बहाना कर शिक्षकों को वेतन देने से मना कर दिये हैं। हालांकि कुछ विद्यालय पहले भी गर्मी के दौरान दो माह का वेतन नहीं देते थे लेकिन इस बार तीन माह का वेतन न देने को लेकर भी प्रायवेट विद्यालय में अध्ययापन कार्य कर रहे शिक्षको में नाराजगी कम नहीं है।
पड़ताल के बाद शिक्षकों ने नाम न बताने की शर्त पर कहा कि यदि हम संबंधित विद्यालय में पढ़ाते हैं तो विरोध करने के बाद हमें आगामी सत्र में हटा दिया जाएगा। जिस वजह से शिक्षकों ने नाम न बताते हुए इतना ही कहा कि निजी विद्यालय के संचालक जब छात्रों से पूरे तीन महीने का शुल्क वसूल रहे हैं तो शिक्षकों को भी वेतन देेना चाहिए।
कोरोना को लेकर लाकडाउन के कारण शिक्षकों की भी माली हालत खराब है। प्रायवेट विद्यालय में शिक्षक कितना वेतन पाते हैं यह सबको मालुम है, इसके बावजूद भी उनके साथ अधिकतर विद्यालय के संचालकों द्वारा नाइंसाफी की जा रही है।
अभिभावको में भी है नाराजगी
लाकडाउन की वजह से आर्थिक तंगी से जूझ रहे अभिभावकों ने कहा कि तीन महीने की फीस सरकार को माफ कर देना चाहिए परन्तु शासन ने जो फरमान जारी किया है उससे अभिभावकों की जेब खाली हो रही है। प्रायवेट विद्यालय में वैसे भी भारी-भरकम फीस ली जाती है। यदि तीन महीने की फीस माफ हो जाती तो कुछ हद तक राहत मिल सकती थी। लेकिन सरकार द्वारा स्पष्ट आदेश जारी न करने की वजह से निजी स्कूल के संचालक फीस माफी के लिए तैयार नहीं हैं। अभिभावकों का कहना है कि सहानुभूति बतौर कलेक्टर एवं स्कूल संचालक कम से कम तीन महीने का फीस तो माफ करा दें जिससे की आर्थिक तंगी का सामना कर रहे अभिभावकों को समस्या न होने पाये।
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