संजय टाइगर रिजर्व क्षेत्र में हाथियों के आतंक पीड़ितों को है मदद का इन्तजार

सीधी धर्मेंद : सीधी जिले के संजय टाइगर रिजर्व क्षेत्र को पर्यटन पर्यावरण और वन्यजीवों के संवर्धन और संरक्षण के लिए विकसित किया गया है लेकिन पर्यटन के क्षेत्र में संजय टाइगर रिजर्व को अभी उतनी सफलता नहीं मिली है जितनी मिलनी चाहिए लेकिन टाइगर रिजर्व बन जाने की वजह से संजय टाइगर रिजर्व के आसपास के क्षेत्र में रहने वाले लोगों को आए दिन जंगली हाथियों शेर सहित अन्य खतरनाक वन्यजीवों की वजह से परेशानी उठाते हुए उन्हें अपने घर और जान से भी हाथ धोना पड़ रहा है पिछले कुछ वर्षों से संजय टाइगर रिजर्व क्षेत्र में छत्तीसगढ़ के जंगलों से हाथियों का कुनबा संजय टाइगर रिजर्व आ जाता है और आतंक मचाते हुए टाइगर रिजर्व क्षेत्र के आसपास रहने वाले गरीब निवासियों की फसल घर पर हमला करके उनके घर को नष्ट कर देते हैं और उनका अनाज खा जाते हैं और हाथियों को डर की दहशत की वजह से गांव वालों को रात-रात भर जंगलों में पेड़ों में गुजर बसर करनी पड़ती है विगत पखवाड़े से सीधी जिले के कुसमी संजय टाइगर रिजर्व क्षेत्र के पोडी रेंज के गांजर ग्राम पंचायत के गोलीपहरी फुलवा में जंगली हाथियों ने आतंक फैलाते हुए करीब आधा दर्जन लोगों का घर गिरा दियाऔर घर के अंदर रखा हुआ अनाज हाथियों ने खा लिया बताया गया कि कुछ लोग गंभीर रूप से चोटिल भी हो गए जिनका इलाज पोड़ी उप स्वास्थ्य केंद्र में कराया गया क्षेत्र मे लगातार हाथियों का आतंक गांजर पंचायत में देखा जा रहा है जहां पर विस्थापन की प्रक्रिया भी आधी अधूरी की गई है कई लोग जो विस्थापन की प्रक्रिया से वंचित थे उन्होंने अपना आवेदन कई बार एसडीएम कार्यालय में दिया है लेकिन राजस्व एवं वन विभाग के अधिकारियों की लापरवाही के कारण लोग वहां से विस्थापित नहीं हो पाए और नतीजन उनको हाथियों से अपनी जान बचानी पड़ रही है। संजय टाइगर रिजर्व में फैले हुए हाथियों के आतंक को लेकर कांग्रेस पार्टी के नेता आनंद सिंह ददुआ ने जिला मुख्यालय सीधी पहुंचकर एन टीवी इंडिया न्यूज़ को जानकारी दी और कहा कि हाथियों के आतंक से जनता परेशान है घर विहीन हो चुकी है उनके खाने और रहने के लाले पड़ गए हैं लेकिन क्षेत्र के विधायक और प्रशासनिक अधिकारी समय पर पीड़ितों को उचित मदद नहीं पहुंचा रहे हैं कांग्रेसी नेता आनंद सिंह ददुआ ने कहा कि आने वाले समय में क्षेत्र की परेशान जनता इसका जवाब चुनावों के माध्यम से देगी। इस मामले पर कई बार खबरें भी प्रकाशित की गई लेकिन प्रशासनिक अधिकारी कर्मचारी गंभीरता से नहीं ले रहे हैं जिम्मेदारों की इस लापरवाही से कहीं न कहीं शासन की छवि धूमिल हो रही है।
