सीधी जिले में मुसलमान भाइयों ने पूरी अकीदत के साथ मनाया बकरीद का त्योहार

सीधी धर्मेंद : ईद-उल-अजहा का अर्थ होता है कुर्बानी वाली ईद. इस दिन बकरे की कुर्बानी दी जाती है. इस्लामिक कैलेंडर के अनुसार, ईल-उल-अजहा का पर्व 12वें महीने की 10 तारीख को मनाया जाता है. रमजान महीने के खत्म होने के 70 दिन बाद मनाया जाता है और इस बार बकरीद का त्योहार 29 जून को मनाया गया। यहूदी, ईसाई और इस्लाम तीनों ही धर्म के पैगंबर हजरत इब्राहीम ने कुर्बानी का जो उदाहरण दुनिया के सामने रखा था, उसे आज भी परंपरागत रूप से याद किया जाता है। आकाशवाणी हुई कि अल्लाह की रजा के लिए अपनी सबसे प्यारी चीज कुर्बान करो, तो हजरत इब्राहीम ने सोचा कि मुझे तो अपनी औलाद ही सबसे प्रिय है। उन्होंने अपने बेटे को ही कुर्बान कर दिया। उनके इस जज्बे को सलाम करने का त्योहार है ईद-उल-जुहा।कुर्बानी का अर्थ है कि रक्षा के लिए सदा तत्पर। हजरत मोहम्मद साहब का आदेश है कि कोई व्यक्ति जिस भी परिवार, समाज, शहर या मुल्क में रहने वाला है, उस व्यक्ति का फर्ज है कि वह उस देश, समाज, परिवार की हिफाजत के लिए हर कुर्बानी देने को तैयार रहे। ईद-उल-फितर की तरह ईद-उल-जुहा में भी गरीबों और मजलूमों का खास ख्याल रखा जाता है। इसी मकसद से ईद-दल-जुहा के सामान यानी कि कुर्बानी के सामान के तीन हिस्से किए जाते हैं। एक हिस्सा खुद के लिए रखा जाता है, बाकी दो हिस्से समाज में जरूरतमंदों में बांटने के लिए होते हैं, जिसे तुरंत बांट दिया जाता है। पूरी दुनिया के साथ सीधी जिले में भी ईद-उल-जुहा बकरीद का त्यौहार मुसलमान भाइयों ने पूरी अकीदत के साथ मनाया ईद उल जुहा के मौके पर सीधी जिले की ईदगाह में मुसलमान भाइयों ने पहुंचकर ईद उल जुहा की नमाज अदा की और देश की सलामती तरक्की खुशहाली एकता भाईचारे और अमन के लिए दुआ की उसके बाद मुसलमान भाइयों ने अपने अपने घर में पहुंचकर बकरे की कुर्बानी दी ईदगाह में नमाज के दौरान जिला प्रशासन और पुलिस प्रशासन ने सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए थे ईद उल जुहा की नमाज अदा करने के बाद मुसलमान भाइयों को मुबारकबाद देने के लिए गणमान्य नागरिक पत्रकार और राजनीतिक दलों के लोग ईदगाह पहुंचे थे।
