रिश्वतखोर जेई और मीटर रीडर लोकायुक्त पुलिस के हाथों 15 हजार रुपए की रिश्वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तार हुआ

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सीधी धर्मेंद : सीधी जिले के मवई डीसी अंतर्गत बिजली विभाग का ऐक रिश्वतखोर जेई और उसका मीटर रीडर लोकायुक्त पुलिस रीवा के हाथों 15 हजार रुपए की रिश्वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तार हो गया। उक्त जेई और मीटर रीडर ने एक विद्युत उपभोक्ता इंद्र बहादुर पिता पटेल कुंज बिहारी पटेल निवासी ग्राम कुशपरी को उसके दुकान में लगे मीटर के बावजूद उसके ऊपर एक लाख 20 हजार रुपए की बिजली चोरी का आरोप लगाकर उसे डरा धमका कर रिश्वत की मांग की थी जिसके बाद पीड़ित ने लोकायुक्त पुलिस एसपी से मामले की शिकायत की लोकायुक्त एसपी ने सारे तथ्यों की जांच पड़ताल के बाद जब मामले को सही पाया उसके बाद उन्होंने रेड की कार्यवाही की लोकायुक्त पुलिस की रेड कार्यवाही में बिजली विभाग के मवई डीसी में पदस्थ जेई प्रकाश चंद निगम और उसका मीटर रीडर 15 हजार की रिश्वत लेते लोकायुक्त के हाथों गिरफ्तार हो गए जिसके बाद लोकायुक्त पुलिस टीम दोनों को लिखा पढ़ी और बयान की कार्यवाही दर्ज करने के लिए शहर स्थित उच्च विश्राम गृह में ले आई इस दौरान प्रमिन्द कुमार लोकायुक्त निरीक्षक लोकायुक्त रीवा पुलिस ने मीडिया को आरोपी को दिखाते हुए सारे घटनाक्रम की जानकारी दी। वही फरियादी ने मीडिया को सारे मामले की जानकारी देते हुए कहा कि हमें जबरिया बिजली चोरी के मामले में फंसाने की कोशिश कर रहे थे लेकिन जब हम बिजली का बिल जमा करने को तैयार हो गए तो हमें 20 हजार देकर मामला निपटा लेने के लिए कहा गया हमने आरजू मिन्नत की उसके बाद 15 हजार रुपए में मान गए जिसके बाद हमने लोकायुक्त ने फरियाद की जिसके बाद यह कार्यवाही हुई है। विद्युत विभाग सीधी में उपभोक्ताओं पर बिजली चोरी का प्रकरण बनाकर उनसे रिश्वत लेने का इस जिले में यह कोई पहला मामला नहीं है इसके पूर्व भी विद्युत विभाग के कुछ कर्मचारी इसी तरह विद्युत चोरी के आरोप में प्रकरण बनाने की बात करके उपभोक्ताओं से रुपए लेते लोकायुक्त पुलिस द्वारा ट्रेप हो चुके हैं बावजूद इसके विद्युत विभाग सीधी में इस तरह का भ्रष्टाचार नहीं रुक रहा है विभाग द्वारा विद्युत चोरी के प्रकरण बनाकर लोक अदालत में समझौते के लिए भेजा जाता है लेकिन लोक अदालत का डर दिखाकर विद्युत विभाग के कुछ अधिकारी चोरी का प्रकरण बनाकर उसे चोरी छुपे अपने ही स्तर में उपभोक्ताओं से सौदा करके मामले को रफा-दफा करने का काम कर रहे हैं जिसकी वजह से इस तरह के मामले सामने आ रहे हैं जरूरत इस बात की है के विद्युत विभाग में इस तरह के मामलों की अच्छी तरह से जांच पड़ताल की जाए और सच्चाई के बाद ही प्रकरण बनाए जाएं जिससे उपभोक्ताओं को भ्रष्टाचार और झूठे विद्युत चोरी के मुकदमे का शिकार ना होना पड़े।

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