सीधी जिले के सुपेला ग्राम में चल रही श्रीमदभागवत कथा का हुआ विश्राम आज होगा भंडारा

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सीधी धर्मेंद : सीधी जिले के सुपेला ग्राम में चल रही श्रीमदभागवत कथा का रविवार को विश्राम हो गया। इस दिन श्रीमद् भागवत का रसपान पाने के लिए भक्तों का सैलाब कथा स्थल पर उमड़ पड़ा। प्रसिद्ध कथावाचक देवी चित्र लेखा जी ने श्रीमद् भागवत कथा का समापन करते हुए कई कथाओं का भक्तों को श्रवण कराया जिसमें प्रभु कृष्ण के 16 हजार 108 विवाह के प्रसंग के साथ, सुदामा प्रसंग की कथा सुनाई। कथा को सुनकर सभी भक्त भाव विभोर हो गए। उन्होंने आगे कहा कि सच्चा वैष्णव दुख हो या सुख दोनों परिस्थिति में समान रहता है। सुख में न वो फूलता है और दुख में वो न डूबता है सुख में मनुष्य सरकती रेती जैसा बन जाता है, समय कब बीत गया पता ही न चला और दुख में मनुष्य के हृदय में कांटा जैसा चुभता है, लेकिन दोनों ही स्थिति में वैष्णव को स्थिर रहना चाहिए।जीवन में कई बार बहुत सारी ऐसी बातें होती हैं जो हमे अच्छी नहीं लगती हैं लेकिन तब भी ये विश्वास रखना चाहिए कि भगवान जो करे सो भली करे। जिस प्रकार माँ बाप अपने सन्तान की रक्षा करते हैं उसी प्रकार अपने भक्तों की रक्षा भी भगवान करते हैं। कथा के अंतिम दिन सुदामा चरित्र के माध्यम से भक्तों के सामने मित्रता की मिसाल पेश की और समाज में समानता का संदेश दिया। साथ ही भक्तो को बताया कि श्रीमद् भागवत कथा का सात दिनों तक श्रवण करने से जीव का उद्धार हो जाता है तो वहीं इसे कराने वाले भी पुण्य के भागी होते है। कथा आयोजक क्षेत्रीय विधायक एवं पूर्व मंत्री श्री कमलेश्वर पटेल ने बताया कि कथा के समापन का भंडारा कल सोमवार को आयोजित किया है। सोमवार को पूर्वान्ह 10:30 बजे परमहंस आश्रम के श्री तुलसीदास जी महाराज पधारेंगे। उसके बाद महाप्रसाद का वितरण होगा।

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